ग़ज़ल बुझे दिल पर मुसर्रत का कोई आलम नहीं होता हज़ारों...

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ग़ज़ल बुझे दिल पर मुसर्रत का कोई आलम नहीं होता हज़ारों चांद हों फिर भी अंधेरा कम नहीं होता ये ज़ख़्मे दिल किसी भी हाल में भरता...

सपने में पाश से बातचीत।

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सपने में पाश से बातचीत 🔹🔸🔹 कविता की किसी कालजयी पंक्ति का  रातभर करते-करते इंतजार  लिखने की टेबल पर ही आ गई नींद   नींद की सत्ता में अपने लिए  थोड़ी-सी...

पर्यावरण पुस्तक से-

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पर्यावरण पुस्तक से- जो आता है। वह जाता है। जबसे गये पिता श्री मेरे, कुछ भी नहीं सुहाता है। जीवन की बारीकी ’’वर्मा’’ दर्शन शास्त्र बताता है। आने-जाने का क्रम निश्चित, फिर...

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