मनरेगा में 21.57 लाख का घोटाला, दोषियों पर कार्रवाई।

मनरेगा में 21.57 लाख का घोटाला, दोषियों पर कार्रवाई।

संतकबीरनगर।।

संतकबीरनगर के विकास खंड नाथनगर की दो ग्राम पंचायतों, टिकुईकोल बाबू और लखनापार, में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 21,57,855 रुपये की वित्तीय अनियमितता और शासकीय धनराशि के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच में दोनों ग्राम पंचायतों के प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और जिला समन्वयक (डीसी) मनरेगा की संयुक्त जांच में इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

15 अप्रैल 2025 को सीडीओ जयकेश त्रिपाठी और डीसी मनरेगा डॉ. प्रभात द्विवेदी ने टिकुईकोल बाबू ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दुर्विजय के खेत के उत्तर में पोखरा निर्माण स्थल पर कोई भी श्रमिक कार्य करते नहीं पाया गया। हैरानी की बात यह थी कि मौके पर पूर्व में कोई कार्य भी नहीं हुआ था। इसके बावजूद, 2 अप्रैल 2025 से 17 अप्रैल 2025 तक मस्टर रोल जारी किया गया और 12 अप्रैल तक नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) में मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई। जांच में पाया गया कि मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) रिपोर्ट में सभी मस्टर रोल पर एक ही फोटो बार-बार अपलोड किया गया, जबकि दूसरी पाली का कोई फोटोग्राफ अपलोड नहीं था।

टिकुईकोल बाबू में 1414 मानव दिवस की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर 3,56,328 रुपये के गबन का प्रयास किया गया। वहीं, दोनों ग्राम पंचायतों में कुल 5370 मानव दिवस की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर 13,53,240 रुपये की शासकीय धनराशि के गबन का प्रयास हुआ। इसके अतिरिक्त, बिना कोई कार्य कराए ही 8,04,615 रुपये का गबन किया गया। इस तरह, दोनों ग्राम पंचायतों में कुल 21,57,855 रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई।

जांच आख्या के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट आलोक कुमार ने बताया कि दोनों ग्राम पंचायतों के प्रधानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, सचिव और तकनीकी सहायक के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में इस तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

यह मामला ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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