कवि सम्मेलन और मुशायरे में गूंजे संवेदना, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों के स्वर
गोरखपुर। हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत प्रेस क्लब सभागार में भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक चेतना से सराबोर इस आयोजन में विभिन्न जनपदों से आए कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से ऐसा समां बांधा कि देर रात तक पूरा सभागार तालियों से गूंजता रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार बाला दिन बेसहारा ने की, जबकि संचालन मशहूर शायर फारूक जमाल ने किया।
कविताओं में दिखा प्रेम, परिवार और समाज का आईना
कार्यक्रम में कवयित्री विभा सिंह ने प्रेम, भक्ति और संवेदनाओं से ओतप्रोत रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया। वहीं आनंद श्रीवास्तव ने बचपन, मां और बदलते पारिवारिक रिश्तों को बेहद मार्मिक अंदाज में प्रस्तुत किया। मंच संचालन कर रहे फारूक जमाल ने अपनी शायरी से माहौल में नई ऊर्जा भर दी। उनकी पंक्तियों पर श्रोताओं ने खूब दाद दी।
व्यंग्य और सामाजिक विसंगतियों पर तीखे प्रहार
कवयित्री सत्यमबदा शर्मा ने समाज के बदलते स्वरूप और वृद्धाश्रम की बढ़ती प्रवृत्ति पर तीखा कटाक्ष किया। वहीं वीरेंद्र मिश्र ‘दीपक’ ने भोजपुरी शैली में सामाजिक यथार्थ और व्यंग्य को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। राजेश सिंह ‘बसर’ की शायरी में समाज, राजनीति और इंसानियत की गहरी झलक दिखाई दी। उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।
सम्मान समारोह के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
मुकेश श्रीवास्तव, भालचंद त्रिपाठी, सुजीत पांडेय तथा अध्यक्षता कर रहे बाला दिन बेसहारा ने मां, बेटियों, गांव और सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित रचनाओं से सभागार को भावुक कर दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी आमंत्रित कवियों और शायरों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। प्रेस क्लब अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ऐसे साहित्यिक और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आगे भी निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे। समारोह में बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।















