नेपाल के नए एमआरपी नियम से सोनौली बॉर्डर पर महाजाम, आयात-निर्यात व्यवस्था चरमराई
महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनौली बॉर्डर इन दिनों भारी अव्यवस्था और जाम की समस्या से जूझ रहा है। नेपाल सरकार द्वारा आयातित सामानों पर नया एमआरपी (मैक्सिमम रिटेल प्राइस) नियम लागू किए जाने के बाद सीमा पर मालवाहक ट्रकों की लंबी कतार लग गई है। हालात ऐसे हैं कि करीब 10 किलोमीटर तक ट्रकों का जाम फैल गया है और सैकड़ों वाहन पिछले 48 घंटों से सीमा पर फंसे हुए हैं। इससे भारत-नेपाल के बीच आयात-निर्यात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है।
एमआरपी नियम लागू होते ही रुकी कस्टम क्लीयरेंस
नेपाल के उद्योग, वाणिज्य तथा आपूर्ति मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने 28 अप्रैल को अधिसूचना जारी कर आयातित पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और अन्य तैयार सामानों पर एमआरपी, ब्रांड नाम और उपभोग की अंतिम तिथि अंकित करना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद 29 अप्रैल से बिना लेबल वाले सामानों की कस्टम क्लीयरेंस रोक दी गई। नए नियम लागू होने के बाद जांच और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया धीमी हो गई, जिससे सीमा पर ट्रकों का दबाव लगातार बढ़ता चला गया।
व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों की बढ़ीं मुश्किलें
खासकर खाद्य सामग्री, एफएमसीजी और दैनिक उपयोग के सामान लेकर नेपाल जाने वाले ट्रकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबे इंतजार, बढ़ते डीजल खर्च और समय पर डिलीवरी न होने से व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीमा पर फंसे ट्रक चालकों के सामने भोजन, पानी और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी संकट गहरा गया है। व्यापारियों का कहना है कि अचानक लागू किए गए नियमों से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और कारोबार पर सीधा असर पड़ा है।
आंशिक राहत के बाद धीरे-धीरे शुरू हुई निकासी
व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों के बढ़ते दबाव के बाद नेपाल भंसार विभाग ने नियम में आंशिक राहत दी है। अब नेपाल के व्यापारियों को लिखित घोषणा पत्र देने और निजी वेयरहाउस में एमआरपी लगाने की शर्त पर वाहनों को पास किया जा रहा है। इससे धीरे-धीरे ट्रकों की निकासी शुरू हुई है। भैरहवा भंसार कार्यालय के प्रमुख हरिहर पौडेल ने बताया कि एमआरपी नियम लागू होने के बाद शुरुआती दिनों में वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, लेकिन अब जांच और पासिंग प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है।















