बस्ती आंखों में आवास के सपने को लेकर दफ्तर दफ्तर चक्कर काट रही,निर्मला

दफ्तर- दफ्तर चक्कर काटने के बाद भी नहीं मिला आवास

बस्ती आंखों में आवास के सपने को लेकर दफ्तर दफ्तर चक्कर काट  रही निर्मला

उत्तर प्रदेश/बस्ती। सरकारी योजनाओं को पलीता उसके खेवनहार ही लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास योजना भी इसी का शिकार है। जनपद के सदर विकास खंड क्षेत्र के बरसांव गांव की महिला निर्मला आवास के लिए तीन साल से दफ्तर-दफ्तर चक्कर लगा रही है।

हर बार उन्हें कोई न कोई बहाना बनाकर जिम्मेदार लौटा देते हैं। निर्मला ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल से लगायत अन्य उच्चाधिकारियों तक लिखा-पढ़ी शुरू की, फिर भी अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगा। निर्मला के इस प्रकरण में उच्चाधिकारियों के स्तर से जारी पत्रक का जवाब तैयार करने तक पूरी कार्रवाई सिमट कर रह गई। नतीजा वह खुले आसमान तले अभी भी बच्चों के साथ रहने को विवश है। निर्मला के पति राधेश्याम मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चलाते है। उनके पास तीन बेटियां हैं।

मुख्य विकास अधिकारी राजेश प्रजापति ने कहा कि तत्काल इस मामले को दिखाकर योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।

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