दिव्यांगों के हुनर से रोशन होगी दीपावली, मंडल स्तरीय मेले में दिखी आत्मनिर्भरता की चमक सीडीओ शाश्वत त्रिपुरारी ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर किया शुभारंभ, खुद की खरीदारी कर बढ़ाया उत्साह चार जिलों के दिव्यांग कारीगरों ने सजाए स्टॉल, मिट्टी के दीये, मूर्तियों से लेकर जूट के उत्पादों तक की रही धूम

दिव्यांगों के हुनर से रोशन होगी दीपावली, मंडल स्तरीय मेले में दिखी आत्मनिर्भरता की चमक

सीडीओ शाश्वत त्रिपुरारी ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर किया शुभारंभ, खुद की खरीदारी कर बढ़ाया उत्साह

चार जिलों के दिव्यांग कारीगरों ने सजाए स्टॉल, मिट्टी के दीये, मूर्तियों से लेकर जूट के उत्पादों तक की रही धूम

गोरखपुर। किसी ने मिट्टी को आकार देकर आकर्षक दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनाईं तो किसी ने जूट, मोतियों और रंगों से अपनी रचनात्मकता को नई पहचान दी। हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भरता के इसी अनूठे संगम का नजारा शुक्रवार को विकास भवन परिसर में आयोजित मंडल स्तरीय दिव्य दीपावली मेला-2026 में देखने को मिला। दिव्यांगजनों की प्रतिभा को मंच देने और उनके हस्तनिर्मित उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित मेले का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर किया।

उद्घाटन के बाद सीडीओ ने मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया। उन्होंने दिव्यांगजनों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की खरीदारी कर उनका उत्साह बढ़ाया। उत्पादों की गुणवत्ता, कलात्मकता और उपयोगिता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है उनके हुनर को पहचान दिलाने और उचित मंच उपलब्ध कराने की।

इस अवसर पर परियोजना निदेशक दीपक सिंह, डीसी मनरेगा समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्टॉलों पर पहुंचकर उत्पादों को देखा और खरीदारी कर दिव्यांग कारीगरों का उत्साहवर्धन किया। अधिकारियों की सहभागिता से स्टॉल लगाने वाले दिव्यांगजनों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी।

चार जिलों के हुनरमंदों ने सजाए आकर्षक स्टॉल

जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस मंडल स्तरीय मेले में गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के दिव्यांगजन अपने हाथों से तैयार किए गए उत्पाद लेकर पहुंचे। दीपावली के मद्देनजर मेले में मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, सजावटी सामान, मिट्टी की कलाकृतियां, मोमबत्तियां और हस्तनिर्मित वस्तुओं के आकर्षक स्टॉल लगाए गए। इसके अलावा जूट के डोरमैट, बैग, मोतियों की मालाएं, चित्रकला, अगरबत्ती, झाड़ू, थैले और भगवान की आकर्षक पोशाक भी बिक्री के लिए उपलब्ध रही।

हर स्टॉल पर दिव्यांग कारीगरों की मेहनत और रचनात्मकता झलक रही थी। कारीगरों ने अपने उत्पादों को खुद सजाया और ग्राहकों को उनकी विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। मेले में पहुंचे लोगों को दीपावली की पूजा और घरों की सजावट से जुड़ी विभिन्न वस्तुएं एक ही स्थान पर खरीदने का अवसर मिला।

खरीदारी से बढ़ेगा आत्मविश्वास और स्वावलंबन

मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन उनके हुनर को पहचान दिलाने के साथ उत्पादों की बिक्री के लिए भी बेहतर मंच उपलब्ध कराते हैं। जब समाज के लोग उनके हाथों से तैयार वस्तुओं को खरीदेंगे तो इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और स्वरोजगार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने लोगों से अपील की कि इस दीपावली पर खरीदारी करते समय दिव्यांगजनों द्वारा तैयार उत्पादों को प्राथमिकता दें। इससे उनकी मेहनत को सम्मान मिलेगा और आजीविका के नए अवसर भी विकसित होंगे।

मेले के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि दिव्यांगता किसी की प्रतिभा और क्षमता की राह में बाधा नहीं बन सकती। उचित अवसर, प्रोत्साहन और बाजार उपलब्ध हो तो दिव्यांगजन अपने हुनर के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर सकते हैं।

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