राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान और वन स्टॉप सेंटर के लिए डीएलएसए ने की प्रभावी बैठक व निरीक्षण, सुनिश्चित होगी न्यायिक पहल।

राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान और वन स्टॉप सेंटर के लिए डीएलएसए ने की प्रभावी बैठक व निरीक्षण, सुनिश्चित होगी न्यायिक पहल।

रायबरेली।  उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) राजकुमार सिंह की अध्यक्षता में दीवानी न्यायालय में राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान की शुरुआत को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह अभियान 1 जुलाई से 30 सितंबर 2025 तक चलेगा, जिसमें वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, शमनीय आपराधिक मामले, ऋण वसूली, संपत्ति बंटवारा, और अन्य सुलह योग्य दीवानी मामलों को जिला मध्यस्थता केंद्र (एडीआर सेंटर, छजलापुर) में भेजने के निर्देश दिए गए।

राजकुमार सिंह ने न्यायिक अधिकारियों को अधिकतम सुलह संभव मामलों की पहचान और उनके निपटारे के लिए तहसील प्रशासन व पुलिस से सहयोग लेने को कहा। बैठक में अन्य अधिकारियों ने भी अभियान की सफलता के लिए सुझाव प्रस्तुत किए।इस बैठक में न्यायिक अधिकारी कुशल पाल, अनिल कुमार पंचम, प्रतिमा, अमित कुमार पांडेय, गुनेन्द्र प्रकाश, रामनेत, सतीश कुमार त्रिपाठी, अभिषेक सिन्हा, पल्लवी प्रकाश, अपर जिला जज/सचिव अनुपम शौर्य, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पवन कुमार सिंह, सिविल जज (सीडी) अमित मिश्रा समेत अन्य उपस्थित रहे। यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को तेज और सुलभ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।इसी क्रम में, राजकुमार सिंह के दिशा-निर्देशन में अपर जिला जज/सचिव अनुपम शौर्य ने वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया, जिसमें जिला प्रोबेशन अधिकारी जयपाल वर्मा भी शामिल रहे।

सेंटर मैनेजर आस्था ज्योति ने महिलाओं के लिए उपलब्ध चिकित्सा, मानसिक, और दैनिक आवश्यकताओं की सुविधाओं की जानकारी दी। अनुपम शौर्य ने निर्देश दिया कि किसी भी समस्या पर तत्काल प्रार्थनापत्र डीएलएसए को भेजा जाए और नवागंतुक महिलाओं/बालिकाओं को विधिक अधिकारों व सुविधाओं का लाभ नियमानुसार सुनिश्चित हो। काउंसलर श्रद्धा सिंह, केसवर्कर अर्चना सिन्हा, और पराविधिक स्वयंसेवक पवन कुमार श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।यह दोहरी पहल न केवल विवाद निपटारे में गति लाएगी, बल्कि महिलाओं व पीड़ितों के लिए सुरक्षा और सहायता का मजबूत आधार भी बनेगी।

डीएलएसए की सक्रियता से न्याय तक पहुंच आसान होगी, जो सामाजिक समरसता और कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देगी।

 

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