रायबरेली में महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित।
रायबरेली
रायबरेली बृहस्पतिवार को फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 पर आधारित एक विशेष विधिक साक्षरता और जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव और अपर जिला जज अनुपम शौर्य ने की, जबकि जिला न्यायाधीश राजकुमार सिंह के दिशा-निर्देशन में यह आयोजन संपन्न हुआ।
शिविर में संस्थान के एमसीए, बीसीए और बीएससी के छात्र-छात्राओं ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की चुनौतियों और चिंताओं पर अपने विचार व्यक्त किए। विशेष रूप से महिला छात्राओं ने इस मुद्दे पर अपनी आशंकाओं को साझा किया। पैनल अधिवक्ता शैलजा सिंह ने उपस्थित लोगों को यौन उत्पीड़न से संबंधित कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन नंबर 181 और विभिन्न सहायता केंद्रों के बारे में बताया।
अनुपम शौर्य ने अपने संबोधन में जीवन में अनुशासन की महत्ता पर जोर देते हुए सर्वोच्च न्यायालय के 1997 के विशाखा दिशा-निर्देशों और PoSH अधिनियम, 2013 की उत्पत्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम यौन उत्पीड़न को परिभाषित करता है, जिसमें शारीरिक संपर्क, यौन प्रस्ताव, अश्लील टिप्पणी, अश्लील चित्र दिखाना और अन्य अवांछित व्यवहार शामिल हैं। अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कार्यस्थल की व्यापक परिभाषा को स्पष्ट किया, जिसमें कार्यालय, टैक्सी, कॉन्फ्रेंस स्थल और घरेलू सेवकों के कार्यस्थल शामिल हैं।
सचिव ने आंतरिक समिति की जांच प्रक्रिया, अनुपालन न करने पर 50,000 रुपये तक के जुर्माने और जांच व अपील की समयसीमा के बारे में विस्तार से बताया। संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष सक्सेना ने कार्यस्थल पर आचार संहिता के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम में प्रश्नोत्तरी सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पराविधिक स्वयंसेवक पूनम सिंह, सौम्या मिश्रा, मनोज कुमार प्रजापति और पवन कुमार श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आरती श्रीवास्तव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शलिनी सिंह ने किया। यह शिविर महिलाओं के अधिकारों और कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।















