डॉ. शाही ने बिना पेट खोले ठीक किया जटिल रेक्टल प्रोलैप्स।
गोरखपुर: रेक्टल प्रोलैप्स, जिसे मलाशय या गुदा का बाहर निकलना कहते हैं, एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है। शुरुआत में मल त्याग के दौरान आंत का अंतिम हिस्सा बाहर आता है और अपने आप अंदर चला जाता है। समय के साथ समस्या बढ़ने पर मरीज को इसे हाथ से अंदर करना पड़ता है। गंभीर मामलों में मलद्वार स्थायी रूप से बाहर रहता है, जिसके लिए आपात सर्जरी जरूरी होती है। कुशीनगर के 68 वर्षीय अकलू कुशवाहा की ऐसी ही जटिल स्थिति को गोरखपुर के शाही ग्लोबल हॉस्पिटल के डॉ. शिव शंकर शाही ने अनूठी तकनीक से ठीक कर चिकित्सा जगत में मिसाल कायम की।

अकलू का मलद्वार का बड़ा हिस्सा बाहर निकल चुका था और सूजन के कारण स्थिति अत्यंत जटिल हो गई थी। गरीबी और लाचारी के चलते वह समय पर इलाज नहीं करवा सके। जब स्थिति बेकाबू हुई, तो स्थानीय डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया। शाही ग्लोबल हॉस्पिटल पहुंचने पर डॉ. शाही ने अकलू की गंभीर स्थिति का बारीकी से आकलन किया। सामान्यतः रेक्टल प्रोलैप्स के लिए रिक्ट्रोपेक्सी सर्जरी की जाती है, जिसमें पेट खोलकर आंत को रीढ़ की हड्डी के पास जाली से फिक्स किया जाता है। लेकिन अकलू के मामले में आंत का बड़ा हिस्सा बाहर होने और सूजन के कारण यह प्रक्रिया असंभव थी।
डॉ. शाही ने बिना पेट खोले एक विशेष तकनीक अपनाई। उन्होंने बाहर निकली आंत के क्षतिग्रस्त हिस्सों को सावधानीपूर्वक काटकर हटाया और शेष हिस्से को अंदर ले जाकर फिक्स कर दिया। इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर अकलू को नया जीवन दिया। सर्जरी के चार दिन बाद अकलू ने सामान्य रूप से खाना-पीना शुरू कर दिया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। अकलू और उनके परिवार ने डॉ. शाही के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। इस उपलब्धि ने न केवल अकलू को राहत दी, बल्कि डॉ. शाही की विशेषज्ञता और नवाचार को चिकित्सा क्षेत्र में रेखांकित किया।















