हरीश के दम पर विवेकानंद पुनः स्थापित, विरोधी हैरान।।
बस्ती।।
बस्ती में भाजपा की कमान एक बार फिर विवेकानंद मिश्र के हाथों में सौंपी गई है, और इसके पीछे पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी की संगठनात्मक ताकत साफ झलकती है। जिले में चर्चा जोरों पर है कि हरीश के करीबी होने का फायदा विवेकानंद को मिला, जिसने जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर उनकी जीत सुनिश्चित की। यह नतीजा उन लोगों के लिए करारा झटका है, जो हरीश की ताकत को कम आंक रहे थे। 
दो बार बस्ती से सांसद रहे हरीश द्विवेदी को पिछले लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। यह हार महज संयोग नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर कुछ कद्दावर नेताओं के ‘भीतरघात’ का नतीजा थी। लेकिन हार के बावजूद हरीश का कद कम नहीं हुआ। भाजपा ने उन्हें असम का प्रभारी बनाकर अहम जिम्मेदारी सौंपी, जिससे उनका प्रभाव और बढ़ा। अब जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक यह कयास लग रहे हैं कि संगठन के इस रथ पर सवार हरीश की उड़ान और ऊंची होने वाली है।
विवेकानंद मिश्र को जिलाध्यक्ष बनाए जाने से जहां हरीश के समर्थकों में उत्साह है, वहीं विरोधी खेमे में खलबली मच गई है। विरोधी मान रहे थे कि हरीश की हार के बाद विवेकानंद हाशिए पर चले जाएंगे, लेकिन संगठन ने एक बार फिर हरीश की ताकत को साबित कर दिया। अब अगर हरीश को प्रदेश स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलती है, तो विरोधियों का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है, जबकि उनके करीबियों के दिन बहुर सकते हैं। फिलहाल, पार्टी में इस मुद्दे पर सुगबुगाहट तेज है, लेकिन कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं। हरीश की यह सांगठनिक जीत जिले की सियासत में नया मोड़ ला सकती है।















