वर्षों पुराना समय माता मंदिर भक्तों की मुरादे होती है। पूरी।
सहजनवा।
सहजनवा तहसील क्षेत्र के बेलहर व गाहासांड़ के मध्य में सैकड़ो वर्षों पुराना समय माता का मंदिर पर लगती है। भक्तों की भारी भीड़ लोगों के मनचाहे मुरादे भी होते हैं। पूरी है।
बता दे की सहजनवा तहसील अंतर्गत बेलहर गांव व नगर पंचायत सहजनवा के गहासाड़ के मध्य स्थित समय माता मंदिर परिसर लगभग 10 एकड़ में फैला हुआ है। परिसर के बीचो बीच एक पुराना पोखरा भी स्थित है। पोखरे के बगल में माता दुर्गा का मंदिर है। समय माता मंदिर परिसर में ही खाटू श्याम मंदिर शिव शंकर भोलेनाथ मंदिर स्थापित है। इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है। लोगों द्वारा बताया जाता है। कि इस मंदिर परिसर में पांडवों ने वन वास के समय यहा पर विश्राम किया था फिर यहां से गुरु गोरखनाथ लिए प्रस्थान किया था मंदिर के महंत रुदल दास ने बताया गया कि पहले यहां पर बहुत विशाल जंगल और नदी था और यहां पर थारू लोग निवास करते थे और जब कलयुग की आरंभ होने वाला था तब थारू यहां से जाने लगे जिस नाव से जा रहे थे वह नदी के जमकातर में धस गई उसी नाव मे थारू ब्राह्मण की एक 9 वर्षीय कन्या भी थी जो नदी में धस गई और सैकड़ो वर्ष पूर्व गांव के लोगों के सपने में आकर समय माता के नाम से मंदिर स्थापित करने की प्रेरणा दी उस समय से यह मंदिर समय माता मंदिर नाम से जाना जाता हैं। इस मंदिर का मान्यता है। कि आने वाले सभी भक्तों का मनोकामना यहां पर पूर्ण होता है। वैसे तो यहां आम दिन भी भक्तों की भीड़ लगी रहती है। पर नवमी और चैत्र रामनवमी में इस मंदिर पर लोगों का मेला लगा रहता है। पुजारी गणेश दास और कैलाश दास ने बताया कि मंदिर में सदैव भक्तों का भीड़ लगा रहता है। पर नवरात्रि के समय सुबह से ही भक्तों की लाइन लग जाती हैं। और माता समय से मनोकामना पूर्ण करने की मनौती भी मानते हैं। मंदिर के परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होता है। और यहां मेला भी लगा रहता है।
समय माता मंदिर के सेवादार संतोष जग्गू दास, सोनू, हनुमान यादव, राहुल यादव, गोल्डी, रघुनाथ दास के साथ ही आदि लोग मंदिर परिसर की साफ सफाई के कार्य में लगे रहते हैं















