21 वेटिलेंटर में 15 का इस्तेमाल नहीं, 6 की मशीनें खराब
– चार माह पहले मॉक ड्रिल में भी नहीं चल पाई थी मशीन
संतकबीनगर। जिला अस्पताल के एमसीएच विंग में कोरोना काल के दौरान 21 बेड का वेटिलेंटर बेड बनाया गया। लेकिन ये निष्प्रयोज्य पड़े हुए हैं। इनमें से 15 वेटिलेटर सही हैं लेकिन इनका कोई उपयोग नहीं है। ये एमसीएच विंग के कमरों में धूल फांक रही हैं। इसके अलावा छह वेटिलेंटर की मशीनें खराब हैं। बैट्रियां काम नहीं कर रही हैं। अगर कोई आपदा आती है तो आईसीयू में 10 और पीआईसीयू में 15 बेड का वेंटीलेटर के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाना पड़ेगा।
कोरोना काल के दौरान वर्ष 2020 में पीएम केयर फंड से जिला अस्पताल के एमसीएच विंग को 21 बेड का वेंटीलेटर मिला था। उस समय इस कोरोना के मरीज भर्ती किए गए थे और इलाज किया जा रहा था। उसके बाद कोरोना धीरे-धीरे खत्म हुआ तो वेंटीलेटर वाले कक्ष में ताला लग गया। इसके बाद से आज तक उस वेटिलेंटर का इस्तेमाल नहीं हुआ। जिसकी वजह से वह कमरों में धूल फांक रहे हैं।
फरवरी माह में शासन के निर्देश पर मॉक ड्रिल हुआ तो उस समय वेंटिलेटर मशीन काम नहीं कर सकी थी। जिसके बाद टेक्नीशियन को दिखाया तो पता चला कि ज्यादातर मशीन की बैट्री खराब हो चुकी है। साथ ही कुछ तकनीकी समस्या भी थी। इसके बाद से फिर कमरे में बंद कर दिया गया। मार्च माह में वेंटीलेटर युक्त 21 बेड काे सीएमओ कार्यालय ने जिला अस्पताल को हैंडओवर कर दिया। उसके बाद इसकी देखरेख जिला अस्पताल के जिम्मे है। आज भी यह मशीनें एमसीएच विंग के कमरों में धूल फांक रही हैं।
वेटिलेंटर खरीदते समय गुणवत्ता पर नहीं दिया था ध्यान
जिले में 21 वेंटिलेटर मशीन खरीदी गई है। उस समय यह सीएमओ कार्यालय के अधीन था। उसकी खरीदारी के समय मशीन की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। जिसके चलते मशीन धीरे-धीरे खराब हो गई और एमसीएच विंग के कमरों में धूल फांक रही है।
आईसीयू और पीआईसीयू में लगे है वेंटिलेटर मशीन
जिला अस्पताल के आईसीयू और पीआईसीयू में पहले से वेंटिलेटर मशीन लगी है, जो कार्य कर रही है। आईसीयू में 10 बेड का वेंटिलेटर और पीआईसीयू में 15 बेड का वेंटिलेटर पहले से मौजूद है। जिस पर गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
कोविड काल की 21 वेंटिलेटर मशीन मिली थी, जिसमें 15 सही कराया गया और छह खराब है। जिसके लिए टेक्नीशियन लखनऊ से बुलाया गया था। जिसने बताया कि कुछ पार्ट नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से मशीन सही नहीं हो पाया था। फिर टेक्नीशियन को कॉल किया गया है। इस बार सभी मशीनों को सही करा दिया जाएगा ताकि कोई आपदा आने पर निपटा जा सके।
– डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमएस















