ऑर्थो, मेडिसिन व सर्जरी के 14 मरीज भर्ती – होली के बाद अस्थमा, त्वचा और मधुमेह के सर्वाधिक मरीज आए।

ओपीडी में 3000 मरीजों का इलाज हुए

– ऑर्थो, मेडिसिन व सर्जरी के 14 मरीज भर्ती
– होली के बाद अस्थमा, त्वचा और मधुमेह के सर्वाधिक मरीज आए

संतकबीरनगर। होली के अवकाश के बाद जिला अस्पताल में बुधवार को मरीजों की भीड़ देखने को मिली। ओपीडी में 3000 मरीजों के का इलाज हुआ। इनमें अधिकतर अस्थमा, हड्डी, स्कीन और मधुमेह से पीड़ित मरीज शामिल थे। चिकित्सकों ने सामान्य मरीजों को परामर्श देकर भेज दिया और गंभीर रूप से पीड़ित ऑर्थो, मेडिसीन व सर्जरी वार्ड में 14 मरीजों को भर्ती किया गया।
24 को रविवार, 25 व 26 मार्च को होली के अवकाश के बाद मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी खुलने पर मेडिसीन, हड्डी, त्वचा, बालरोग विभाग समेत अन्य विभागों के चिकित्सकों के कक्ष में मरीजों की भीड़ दिखी। मेडिसिन विभाग की ओपीडी में बुखार, अस्थमा, मधुमेह और त्वचा के सबसे अधिक मरीज रहे। दोपहर तक तीन गंभीर मरीजों को मेडिसीन वार्ड में भर्ती किया गया। यही हाल हड्डी रोग विभाग का रहा। हड्डी रोग विशेषज्ञ के कक्ष के बाहर महीजों की लंबी लाइन लरी रही।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. निशान्त कुमार सिंह के मुताबिक होली के बाद अस्पताल खुलने के कारण मरीजों की भीड़ अधिक है। इसमें ज्यादातर चोट से घायल मरीज हैं। दोपहर तक गंभीर रूप से पीड़ित आठ मरीजों को ऑथो वार्ड व सर्जरी के तीन मरीजों को भर्ती किया गया। ओपीडी में परामर्श लेने पहुंचे बुखार, सर्दी, जुकाम के मरीजों की भी संख्या अधिक रही।

होली के बाद मरीजों की संख्या बढ़ना आम है। खाने-पीने में लापरवाही बरतने के कारण मधुमेह के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। यहीं हाल अस्थमा के मरीजों का भी होता है। कृत्रिम रंग श्वास के मरीजों की परेशानी बढ़ा देता है। रंग नाक, कान व मुंह में जाने से अस्थमा पीड़ितों की परेशानी को बढ़ा देता है। इसलिए होली के बाद ओपीडी में सामान्य मरीजाेें के साथ अस्थमा, मधुमेह आदि से पीड़ित की संख्या बढ़ जाती है।
– डाॅ. रमाशंकर, परामर्श चिकित्सक

दो दिनों में इमरजेंसी में पहुंचे 143 मरीज
25 मार्च को इमरजेंसी में 70 मरीज पहुंचे जबकि 26 को हाेली के दिन 73 मरीज पहुंचे। दो दिनों में 143 मरीज पहुंचे है। जिसमें दुर्घटना में घायलों की संख्या 28 रही। गंभीर रूप से घायल 26 मरीजाें को चिकित्सकों ने रेफर कर दिया। जबकि शेष मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।

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