मलिन बस्ती पहुंचीं डीएम, 10 बच्चों का कराया स्कूल में नामांकन, ड्रॉपआउट छात्रा की पढ़ाई फिर शुरू
‘हर बच्चा विद्यालय तक पहुँचे’ अभियान को मिली गति, अभिभावकों से बच्चों को नियमित स्कूल भेजने की अपील
रायबरेली। जनपद में शत-प्रतिशत नामांकन और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने मंगलवार को नया पुरवा मलिन बस्ती पहुंचकर बच्चों और उनके अभिभावकों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा के महत्व को बताते हुए स्वयं पहल कर 10 बच्चों का विद्यालय में नामांकन कराया और उन्हें निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें वितरित कीं।
जिलाधिकारी ने पांच बच्चों का नामांकन कम्पोजिट विद्यालय चकअहमदपुर तथा पांच बच्चों का कम्पोजिट विद्यालय सत्यनगर में कराया। उन्होंने बच्चों से नियमित रूप से विद्यालय आने, मन लगाकर पढ़ाई करने और शिक्षा को अपने उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव बनाने का आह्वान किया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी की मुलाकात एक ऐसी छात्रा से हुई, जिसने किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। उन्होंने छात्रा और उसके परिजनों को प्रेरित कर उसका कक्षा सात में पुनः नामांकन कराया। जिलाधिकारी ने कहा कि आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। प्रत्येक बच्चे को विद्यालय तक पहुँचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें और उनकी शिक्षा में सक्रिय सहयोग करें। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा, पाठ्य-पुस्तकें, यूनिफॉर्म, मध्याह्न भोजन तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनका लाभ हर पात्र बच्चे तक पहुँचना चाहिए।
जिलाधिकारी ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद में ऐसे सभी बच्चों की पहचान की जाए, जो अब तक विद्यालय में नामांकित नहीं हैं या किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ चुके हैं। ऐसे बच्चों का तत्काल नामांकन सुनिश्चित करते हुए उन्हें नियमित रूप से विद्यालय से जोड़ा जाए। उन्होंने विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर विशेष ध्यान देने के भी निर्देश दिए।
इस अवसर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल सिंह सहित बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी की इस पहल से मलिन बस्ती के अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी और कई परिवारों ने अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने का संकल्प लिया।















