ईंट भट्ठों के जिग-जैग परिवर्तन की समय सीमा दो वर्ष बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन धनघटा विधायक को सौंपा
संतकबीरनगर। जिला ईंट निर्माता समिति ने पारंपरिक ईंट भट्ठों को जिग-जैग तकनीक में परिवर्तित करने की निर्धारित समय सीमा दो वर्ष बढ़ाने की मांग उठाई है। इस संबंध में समिति ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन धनघटा विधायक गणेश चंद्र चौहान को सौंपा।
समिति के अध्यक्ष रवि उदय पाल ने कहा कि ईंट भट्ठा उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख रोजगार आधारित उद्योग है। यह बिना किसी सरकारी सहायता के संचालित होता है और हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराता है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के माध्यम से यह उद्योग पलायन रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक ईंट भट्ठों को जिग-जैग तकनीक में बदलने पर प्रत्येक भट्ठे पर लगभग 50 से 60 लाख रुपये का खर्च आता है। वर्तमान समय में ईंट कारोबार आर्थिक मंदी से गुजर रहा है, जिससे भट्ठा संचालकों की स्थिति कमजोर हो गई है। उत्पादन लागत में वृद्धि और कई क्षेत्रों में बेमौसम बारिश के कारण उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ईंट भट्ठों में वृक्षारोपण सहित कई दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं, जिससे उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ा है। ऐसी स्थिति में अधिकांश भट्ठा संचालकों के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर जिग-जैग तकनीक अपनाना संभव नहीं हो पा रहा है।
समिति ने मांग की है कि वर्तमान परिस्थितियों और उद्योग से जुड़े लोगों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए जिग-जैग तकनीक में परिवर्तन की समय सीमा दो वर्ष बढ़ाई जाए, ताकि उद्योग को राहत मिल सके और हजारों लोगों का रोजगार प्रभावित न हो।
इस दौरान महामंत्री दिनेश कुमार सिंह (मन्नू), मोहम्मद फैसल खान सहित अन्य समिति पदाधिकारी उपस्थित रहे।















