सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में “कुलपति-शिक्षक संवाद” आयोजित, शिक्षकों को बताया शिक्षा व्यवस्था की रीढ़

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में “कुलपति-शिक्षक संवाद” आयोजित, शिक्षकों को बताया शिक्षा व्यवस्था की रीढ़

 

सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चयन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में “कुलपति-शिक्षक संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय में शैक्षणिक वातावरण को अधिक सुदृढ़ बनाना, शिक्षकों के साथ संवाद स्थापित करना तथा शिक्षण, शोध और छात्रहित से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श करना रहा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. कविता शाह ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक शक्ति उसके निष्ठावान, कर्मठ और कुशल शिक्षक होते हैं। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि समाज को नई दिशा देने और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षकों को नवीन शोध, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक शैक्षणिक परिवर्तनों से स्वयं को लगातार अद्यतन रखना चाहिए।

कुलपति ने कहा कि संवेदनशील दृष्टिकोण और सकारात्मक मार्गदर्शन के माध्यम से ही विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने पर भी जोर दिया।

संवाद कार्यक्रम के दौरान महिला एवं पुरुष शिक्षकों के साथ अलग-अलग चर्चा कर उनकी समस्याएं, सुझाव और आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना गया। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने, खेल सुविधाओं के विस्तार, अध्ययन केंद्रों के संचालन, परिवहन व्यवस्था तथा विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुविधाओं में सुधार को लेकर अपने सुझाव रखे।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिसर की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, बस सुविधा बढ़ाने तथा विद्यार्थियों को साइकिल से आने के लिए प्रेरित करने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक सुरक्षित, प्रेरणादायी और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सौरभ ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम की जानकारी विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह द्वारा दी गई।

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