मुरादाबाद में फर्जी आख्या का खेल! लेखपाल सुनील शर्मा दोषी, मूल वेतन पर रिवर्ट पुलिस लाइन की सरकारी जमीन को निजी नाम पर करने की कोशिश नाकाम
डीएम अनुज सिंह का सख्त फैसला; सिविल लाइंस से हटाकर ठाकुरद्वारा ट्रांसफर संदिग्ध NOC मामले में भी जांच जारी, तहसील रिकॉर्ड में कोई निशान नहीं
मुरादाबाद। पुलिस लाइन क्षेत्र की मूल्यवान सरकारी (नजूल) भूमि पर फर्जी आख्या देकर उसे निजी व्यक्ति के पक्ष में दिखाने के गंभीर मामले में लेखपाल सुनील शर्मा पर विभागीय कार्रवाई हुई है। जिलाधिकारी अनुज सिंह ने जांच पूरी होने के बाद लेखपाल को दोषी पाते हुए सख्त दंड दिया है।
जांच में पाया गया कि लेखपाल सुनील शर्मा ने गलत और तथ्यों से परे आख्या तैयार की, जिसके जरिए सरकारी जमीन को निजी नाम पर हस्तांतरित करने की कोशिश की गई। विभागीय जांच में आख्या पूरी तरह फर्जी साबित हुई। डीएम ने तत्काल आदेश जारी कर लेखपाल को मूल वेतन पर रिवर्ट कर दिया है। साथ ही उन्हें सिविल लाइंस से हटाकर ठाकुरद्वारा में स्थानांतरित कर दिया गया है।
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। सिविल लाइंस क्षेत्र में नजूल भूमि से जुड़ी एक संदिग्ध एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) का मामला भी जांच के दायरे में है। एमडीए (मुरादाबाद विकास प्राधिकरण) में दाखिल इस एनओसी पर लेखपाल सुनील शर्मा के हस्ताक्षर मिले, जबकि तहसीलदार के हस्ताक्षर अपठनीय (पढ़े नहीं जा सके) पाए गए। पूछताछ में लेखपाल ने एनओसी जारी करने की कोई याद होने से इनकार कर दिया।
तहसील और नजूल रिकॉर्ड की जांच में इस एनओसी का कोई दस्तावेज, क्रमांक या रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिला, जिससे इसकी प्रामाणिकता पर पूरी तरह संदेह गहरा गया है। इस संदिग्ध एनओसी प्रकरण में भी लेखपाल सुनील शर्मा के खिलाफ जांच जारी है और आगे की कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।
डीएम अनुज सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी भूमि के दुरुपयोग और फर्जीवाड़े पर जीरो टॉलरेंस रहेगा। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि राजस्व प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे।















