रायबरेली में फार्मर रजिस्ट्री अभियान को मिली गति डीएम हर्षिता माथुर ने प्रचार वाहनों को दिखाई हरी झंडी, 10 दिनों में बचे 1.67 लाख किसानों की रजिस्ट्री का लक्ष्य

रायबरेली में फार्मर रजिस्ट्री अभियान को मिली गति

डीएम हर्षिता माथुर ने प्रचार वाहनों को दिखाई हरी झंडी, 10 दिनों में बचे 1.67 लाख किसानों की रजिस्ट्री का लक्ष्य

रायबरेली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिला प्रशासन ने तेजी से कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी हर्षिता माथुर ने कलेक्ट्रेट परिसर से प्रचार-प्रसार के लिए तैयार विशेष प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वाहन जनपद के सभी विकास खंडों में 10 दिनों तक सक्रिय रहेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाकर बचे हुए किसानों को रजिस्ट्री कराने के लिए प्रेरित करेंगे।

जिलाधिकारी हर्षिता माथुर ने बताया कि जनपद में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के कुल लाभार्थियों की संख्या 5,43,325 है। इनमें से 62,534 कृषक विभिन्न कारणों से अपात्र पाए गए, जिसके बाद शेष लक्ष्य 4,80,791 किसानों का निर्धारित हुआ। अभी तक 3,13,379 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी है, जो लक्ष्य का 65.18 प्रतिशत है। अवशेष 1,67,412 किसानों की रजिस्ट्री शीघ्र पूरी करने के लिए यह प्रचार अभियान शुरू किया गया है।

उप निदेशक कृषि विनोद कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि जनपद में अब हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि सभी पात्र किसान सामने आएं और उनकी फार्मर रजिस्ट्री बन जाए। उन्होंने जोर दिया कि सरकार की किसान कल्याणकारी योजनाओं का संचालन अब पूरी तरह फार्मर रजिस्ट्री के डाटा पर आधारित होगा। केवल रजिस्टर्ड किसानों को ही विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।

उन्होंने आगे बताया कि खरीफ 2026 से अनुदानित उर्वरक भी फार्मर रजिस्ट्री के डाटा के अनुसार ही उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड, आपदा में क्षतिपूर्ति का आकलन, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद और फसल बीमा की क्षतिपूर्ति जैसी सुविधाएं भी रजिस्ट्री डाटा के आधार पर बिना अतिरिक्त सत्यापन के शीघ्रता से प्रदान की जाएंगी।

जिलाधिकारी ने सभी किसानों से अपील की कि वे निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), ग्राम पंचायत या कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर अपनी फार्मर रजिस्ट्री शीघ्र करा लें, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर प्राप्त हो सके। प्रचार वाहनों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में माइकिंग, पम्फलेट वितरण और जागरूकता सभाओं के जरिए यह संदेश पहुंचाया जाएगा।

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