राज्य आयुक्त दिव्यांगजन ने रायबरेली में मोबाइल कोर्ट में सुनी दिव्यांगजनों की समस्याएं, दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश
रायबरेली,। जनपद रायबरेली के रतापुर स्थित सामुदायिक केंद्र में राज्य आयुक्त, दिव्यांगजन उत्तर प्रदेश प्रो. हिमांशु शेखर झा ने दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए आयोजित मोबाइल कोर्ट का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस विशेष शिविर में पहुंचे दिव्यांगजनों की व्यक्तिगत सुनवाई करते हुए आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के सख्त निर्देश दिए।
मोबाइल कोर्ट में दिव्यांगता प्रमाणन (मेडिकल बोर्ड), यूडीआईडी कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, दिव्यांग पेंशन, रेल कंसेशन प्रमाण-पत्र आदि से जुड़े विभिन्न स्टॉल लगाए गए थे। कुल 182 प्रकरणों की सुनवाई की गई, जिनमें से अधिकांश पर मौके पर ही समाधान के निर्देश जारी किए गए। आयुक्त ने विभिन्न सरकारी योजनाओं से दिव्यांगजनों को लाभान्वित करने हेतु संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
कार्यक्रम में समाज कल्याण, शिक्षा, ग्राम्य विकास, पंचायतीराज, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, पुलिस, परिवहन, नगर निकाय, विद्युत, खाद्य एवं आपूर्ति विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैंकों के प्रतिनिधि एवं अग्रणी जिला प्रबंधक (बैंक ऑफ बड़ौदा) भी उपस्थित थे। दिव्यांगता प्रमाणन के लिए चिकित्सकीय बोर्ड की व्यवस्था की गई तथा आवश्यकता पड़ने पर एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई। दिव्यांगजनों की सुविधा हेतु पेयजल, शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गईं।
इस मोबाइल कोर्ट के माध्यम से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016नकी भावना के अनुरूप ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को उनके अधिकारों, योजनाओं एवं सुविधाओं की जानकारी प्रदान की गई। आयुक्त ने जोर दिया कि दिव्यांगजनों की समस्याओं का समाधान त्वरित एवं संवेदनशील होना चाहिए, ताकि वे मुख्यधारा में पूर्ण भागीदारी कर सकें।
इस अवसर पर उप निदेशक दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग लखनऊ मंडल राजेश मिश्र, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी सृष्टि अवस्थी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी मोहन त्रिपाठी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी जयपाल वर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी सौम्यशील सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी उबेदुर्रहमान सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
यह आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार की दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशील नीतियों का जीवंत उदाहरण है, जिससे ग्रामीण स्तर पर सैकड़ों दिव्यांगजनों को राहत मिलने की उम्मीद है।















