विरासत गलियारा: विकास का सपना बना व्यापारियों के लिए अभिशाप
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी विरासत गलियारा परियोजना अब आसपास के व्यापारियों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। निर्माण में अत्यधिक देरी, बेतरतीब खुदाई, मलबे का ढेर और ठेकेदार की कथित गुंडागर्दी से त्रस्त व्यापारी सड़कों पर उतर आए हैं। समस्त व्यापार मंडल के नेतृत्व में उन्होंने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा तथा चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो व्यापक आंदोलन अनिवार्य हो जाएगा।
व्यापारियों का मुख्य आरोप है कि नालियों और चौड़ीकरण के नाम पर महीनों पहले गड्ढे खोदे गए, लेकिन उन्हें भरने या आगे बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। सड़कें गड्ढों और मलबे से पट गई हैं, नालियों का गंदा पानी बह रहा है, जिससे दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। ग्राहक घूमकर भाग रहे हैं और व्यापार पूरी तरह ठप पड़ चुका है। कई परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।
समस्त व्यापार मंडल के नितिन जायसवाल के नेतृत्व में तथा गुड्स एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष सिंह सहित धर्मशाला से जटाशंकर तक के व्यापारी मंडलायुक्त और डीएम से मिले। नितिन जायसवाल ने स्पष्ट किया कि वे परियोजना के विरोधी नहीं, बल्कि अव्यवस्थित और बिना प्लानिंग के काम के खिलाफ हैं। ठेकेदार बिना सूचना के खुदाई कर छोड़ देते हैं, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और रोजगार संकट में है।
मनीष सिंह ने गंभीर आरोप लगाया कि ठेकेदार के लोग शिकायत करने पर गाली-गलौज और मारपीट करते हैं, जिससे व्यापारी अपनी दुकानों पर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
व्यापारियों की प्रमुख मांगें हैं:
– खुदाई केवल काम शुरू होने के 1-2 दिन पहले हो और उसी गति से पूरा किया जाए।
– मलबा तत्काल हटाया जाए।
– नालियों की नियमित सफाई हो।
– गड्ढों को फौरन भरा जाए।
मंडलायुक्त ने शिकायतों को गंभीरता से लिया और डीएम को तत्काल निर्देश दिए कि व्यापारियों से संवाद कर समस्याओं का समाधान किया जाए। ठेकेदार को सख्त चेतावनी दी जाएगी; अभद्र व्यवहार करने वालों को परियोजना से हटाया जाएगा तथा जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा।
इस दौरान **देवेश वैश्य, अनूप कुमार गुप्ता, आलोक कुमार वैश्य, अनुराग गुप्ता, सुशील कुमार, कविता रमानी, विनोद कुमार गुप्ता, योगेंद्र वैश्य, साहिल जायसवाल** सहित दर्जनों व्यापारी उपस्थित रहे।
यह घटना गोरखपुर में विरासत गलियारा परियोजना के दौरान बार-बार उठ रही देरी और असुविधा के मुद्दों को उजागर करती है, जहां विकास के नाम पर स्थानीय व्यापारियों की आजीविका दांव पर लग गई है। प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है, वरना आक्रोश और बढ़ सकता है.















