समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर शिक्षकों ने डीएम, बीएसए को सौंपा ज्ञापन; समायोजन की अनियमितताओं को दूर करने की उठाई मांग

समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर शिक्षकों ने डीएम, बीएसए को सौंपा ज्ञापन; समायोजन की अनियमितताओं को दूर करने की उठाई मांग

बस्ती। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव के नेतृत्व में शिक्षकों ने मंगलवार को विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर जिलाधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में तीसरे चरण के समायोजन में हुई अनियमितताओं को दूर करने, शिक्षकों को बीएलओ कार्य से मुक्त करने, आवारा मवेशियों की रखवाली जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों के आदेश वापस लेने तथा वरिष्ठता सूची में सभी शिक्षकों को शामिल करने की प्रमुख मांगें रखी गईं।

शिक्षकों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें शीघ्र पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

डीएम के प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए जिला कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव ने कहा कि प्रथम और द्वितीय चरण के समायोजन वाले विद्यालयों से ही शिक्षकों को तीसरे चरण में दूसरे स्कूलों में समायोजित कर दिया गया। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तीन अध्यापक अनिवार्य होने के बावजूद वहां से शिक्षकों को हटाकर अन्यत्र भेजा गया। एकल एवं बंद विद्यालय तथा आवश्यकता वाले स्कूलों में समायोजन नहीं किया गया। शिक्षकों से विकल्प नहीं लिया गया और मनमानी तरीके से स्कूल आवंटित किए गए। उन्होंने मांग की कि इन अनियमितताओं को दूर कर पुनः समायोजन प्रक्रिया पूरी की जाए।

जिला उपाध्यक्ष रवीश कुमार मिश्र ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद शिक्षकों से बीएलओ सहित अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य लिए जा रहे हैं, जो उनके मान-सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने सभी ऐसे आदेशों को तत्काल वापस लेने की मांग की।

शिक्षक नेता हरेंद्र यादव और सनद पटेल ने आवारा कुत्तों व मवेशियों को पकड़ने जैसे मनमाने आदेश वापस लेने की मांग की। अशोक यादव और सुरेश गौड़ ने वरिष्ठता सूची में जनपद के समस्त कार्यरत शिक्षकों को शामिल करने की अपील की।

ज्ञापन सौंपने वालों में अशोक विजय यादव, रामस्वरूप, राम भवन यादव, रामपियारे कन्नौजिया, लक्ष्मण लाल, उमाशंकर, रमाशंकर लाल, मुरलीधर, विजय, विनय सिंह, अनुराग श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, प्रदीप गुप्ता, मुरलीधर, वशिष्ठ शुक्ला, वेद उपाध्याय, अनीस अहमद सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे।

शिक्षकों ने कहा कि उनकी मांगें न्यायोचित हैं और यदि प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो वे आगे कड़े आंदोलन की राह अपनाने को मजबूर होंगे।

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