सूचना का अधिकार: गाजियाबाद में पारदर्शिता की नई मिसाल, आयुक्त की अधिकारियों को सख्त हिदायत।

सूचना का अधिकार: गाजियाबाद में पारदर्शिता की नई मिसाल, आयुक्त की अधिकारियों को सख्त हिदायत।

गाजियाबाद। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम को सुशासन और पारदर्शिता का आधार बताते हुए उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त वीरेंद्र सिंह वत्स ने गुरुवार को गाजियाबाद के कलेक्ट्रेट में महात्मा गांधी सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आरटीआई केवल कानून नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार पर लगाम, प्रशासनिक जवाबदेही और जनसशक्तिकरण का क्रांतिकारी कदम है। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल ने पुष्पगुच्छ भेंटकर आयुक्त का स्वागत किया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने सभी अतिथियों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया।

आयुक्त वत्स ने अधिकारियों को चेताया कि समयबद्ध और सटीक सूचना देना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। “जनसूचना को अपनी ड्यूटी का हिस्सा बनाएं। यदि आप आज नागरिकों को न्यायसंगत सूचना नहीं देंगे, तो कल आप भी इस व्यवस्था के शिकार हो सकते हैं,” उन्होंने प्रभावशाली उदाहरणों के साथ समझाया। एक मत्स्य विभाग के अधिकारी की चिकित्सा प्रतिपूर्ति तीन साल तक अटकी रही, लेकिन सूचना आयोग के हस्तक्षेप से एक माह में चेक जारी हुआ। इसी तरह, एक अधिकारी की गायब सेवा पुस्तिका चार सुनवाइयों के बाद तैयार की गई। 

वत्स ने स्पष्ट किया कि आयोग केवल दंड देने का मंच नहीं, बल्कि नागरिकों को त्वरित राहत दिलाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने अफसोस जताया कि अधिकतर मामले प्रथम अपीलीय स्तर पर ही निपट सकते हैं, यदि अधिकारी सजग हों। आरटीआई उल्लंघन पर धारा 20(1) के तहत 25,000 रुपये तक का जुर्माना और धारा 20(2) के तहत विभागीय कार्रवाई की चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, “अपने करियर को दागदार करने का जोखिम क्यों उठाएं?” 

आयुक्त ने जनसूचना अधिकारियों को सलाह दी कि केवल उपलब्ध और नियंत्रण वाली सूचना ही दी जाए। राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता या तृतीय पक्ष की निजी जानकारी आरटीआई के दायरे से बाहर है। 500 शब्दों से अधिक के आवेदन निरस्त हो सकते हैं। उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए विशेष सहायता और धारा 4 के तहत स्वतः सूचना प्रकटीकरण पर जोर दिया, ताकि आवेदनों की संख्या कम हो। 

बैठक में आरटीआई विशेषज्ञ शैलेंद्र सिंह चौहान, निजी सचिव शरफुज्जमां, एडीएम, सीएमओ, नगर निगम और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। आयुक्त के प्रेरक संबोधन और कठोर चेतावनी ने अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों का अहसास कराया, जिससे गाजियाबाद में सुशासन और पारदर्शिता की नई राह बनेगी।

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