हेड कांस्टेबल पर दुष्कर्म प्रयास का आरोप जांच में झूठा, महिला ने स्वीकारी गलती
संतकबीरनगर:धनघटा थाने पर तैनात एक हेड कांस्टेबल पर दुष्कर्म के प्रयास का आरोप जांच में पूरी तरह निराधार और झूठा पाया गया। अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुशील कुमार सिंह की जांच में खुलासा हुआ कि शिकायतकर्ता महिला ने अपने नाबालिग बेटे को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए यह भ्रामक आरोप लगाया था।
महिला ने स्वयं जांच के दौरान अपने आरोपों को गलत और निराधार स्वीकार किया। एएसपी ने इसकी विस्तृत रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक (एसपी) को सौंप दी है। घटना की शुरुआत 14 अगस्त 2025 को हुई, जब धनघटा थाना क्षेत्र की एक महिला ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि 13 अगस्त की शाम एक हेड कांस्टेबल उसे और उसके बेटे को थाने ले जाने के बहाने बाइक पर बैठाया। रास्ते में सुनसान जगह पर उसने गलत काम करने का प्रयास किया, जबकि दूसरा सिपाही उसके बेटे को अलग रास्ते से थाने ले गया। इस गंभीर आरोप की जांच के लिए एसपी ने एएसपी को जिम्मेदारी सौंपी। जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता का आरोप उसके बेटे के खिलाफ 12 अगस्त 2025 को दर्ज एक अन्य शिकायत का जवाब था। अंबेडकरनगर के इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र की एक महिला ने 11 अगस्त को धनघटा थाने में शिकायत की थी कि शिकायतकर्ता का बेटा उसे चौराहे पर छोड़ने के बहाने बाइक पर बैठाकर सुनसान जगह ले गया और बलात्कार किया। इस शिकायत पर कार्रवाई के लिए एक दरोगा और तीन सिपाहियों ने शिकायतकर्ता के बेटे को थाने बुलाया था। दोनों पक्षों ने बाद में सुलह कर ली, और अंबेडकरनगर की महिला वापस चली गई।
एसपी संदीप कुमार मीना ने चेतावनी दी कि झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, “ऐसे भ्रामक आरोप कानून का दुरुपयोग हैं, और पुलिस इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।” यह मामला पुलिस की सतर्कता और निष्पक्ष जांच का उदाहरण है।















