किशोर दा की धुनों का जादू, “अपनी तो जैसे तैसे” ने बांधा समा.

किशोर दा की धुनों का जादू, “अपनी तो जैसे तैसे” ने बांधा समा.

 

गोरखपुर। सोमवार की रात गोरखनाथ के एक मैरिज हॉल में स्वर सम्राट किशोर कुमार की अमर धुनों ने ऐसा जादू बिखेरा कि गोरखपुर संगीत की मस्ती में डूब गया। क्रिएटिव फ्रेंड्स सोसाइटी और सक्षम उत्तर प्रदेश के बैनर तले आयोजित “अपनी तो जैसे तैसे” संगीतमयी संध्या ने सभागार को किशोर दा के स्वर्णिम युग का मंदिर बना दिया। “जीवन के सफर में”, “रूप तेरा मस्ताना”, “मेरे सपनों की रानी” जैसे गीतों की लहरियों ने हर दिल को झंकृत कर दिया। 

 

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और किशोर दा के चित्र पर पुष्पांजलि से हुआ। वरिष्ठ उद्घोषक डॉ. संजयपति त्रिपाठी ने अपनी मधुर और हास्य-भरी शैली से संचालन कर माहौल को जीवंत बनाए रखा। हरीश हंस, बबिता, जान्हवी, डॉ. टीवीएम त्रिपाठी, डॉ. सोहन गुप्ता, रविंद्र नाथ पांडेय और संजय जायसवाल की गायकी ने गीतों में ऐसी भावनाएं भरीं कि श्रोता तालियों और वाहवाही से सभागार गूंजा उठा। “जिंदगी एक सफर है सुहाना” गाते हुए मानो समय ठहर गया, और हर कोई किशोर दा की आवाज में खो गया। 

 

अध्यक्ष डॉ. अमित मिश्र ने संगीत को “हृदयों का शाश्वत सेतु” बताया, तो मुख्य अतिथि डॉ. डी.के. गुप्ता ने इसे “स्मृतियों का महापर्व” करार दिया। आयोजक हरीश बबिता हंस ने इसे गोरखपुर की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव बताते हुए सभी का आभार जताया। विवेक श्रीवास्तव, सत्या पांडेय, शैलेश त्रिपाठी ‘मोबाइल बाबा’, सुधा मोदी, सुधीर जैन, डॉ. आरपी शुक्ला, संदीप टेकड़ीवाल, डॉ. सतीश चंद्रा, अखिलेश ओझा, विजय श्रीवास्तव, सूर्य प्रकाश गुप्ता और नीरज अस्थाना जैसे संरक्षकों की उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमामय बनाया। 

 

समापन “चलते-चलते” और “अभी मुझ में कहीं” जैसे गीतों के साथ हुआ, जिन्होंने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। यह संध्या न सिर्फ संगीत का उत्सव थी, बल्कि किशोर दा की स्मृतियों का एक अविस्मरणीय तोहफा थी, जिसकी गूंज देर तक गोरखपुर के दिलों में गूंजती रहेगी।

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