कोर्ट के आदेश पर कब्र से निकाला गया शव, कुछ माह पूर्व हुई थी वृद्ध की मौत
– पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
– महुली थाना क्षेत्र के ग्राम मानपुर में न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ था हत्या का केस
उत्तर प्रदेश संतकबीरनगर।
महुली थाना क्षेत्र के ग्राम मानपुर में गुरुवार को न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने कुछ माह पूर्व दफन किए गए मृतक के शव को कब्र से बाहर निकलवाया। शव के अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
ग्राम मानपुर निवासी राम प्यारे उर्फ फर्जी का कुछ माह पूर्व निधन हो गया था। बताया जाता है कि टीबी का मरीज होने के चलते उस समय मृतक के शव को कुआनो नदी के किनारे रीति रिवाज के साथ दफन कर दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्ष बाद राम प्यारे के निधन की सूचना पर उनका पुत्र बाबूलाल गांव पहुंचा। उसने सीजेएम न्यायालय में पट्टीदारी के ही राम जियावन, राम सिंह, विश्राम पुत्रगण महनू निषाद के खिलाफ हत्या करने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करने का प्रार्थना पत्र दिया। न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज करते हुए महुली पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दिया। पुलिस की विवेचना में जब राम प्यारे के स्वाभाविक मौत होने की पुष्टि होने लगी तो वादी ने मृतक के शव का पीएम कराने की मांग किया। कोर्ट के आदेश और डीएम की अनुमति के बाद गुरुवार को महुली पुलिस ने कब्र खुदवाकर मिले शव के अवशेषों को पीएम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर भगवान सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर शव के अवशेष को कब्र से निकाल कर पीएम के लिए भेज दिया गया है।
मानपुर के ग्रामीणों का कहना है कि मृतक राम प्यारे का बेटा कई साल पूर्व घर से कहीं चला गया था। बेटी की शादी के बाद राम प्यारे जब अकेले रह गए तो उनके पड़ोसियों ने ही उनका भरण पोषण किया। बताते हैं कि बीमारी की हालत में पड़ोसियों द्वारा खुद की सेवा से अभिभूत हो कर राम प्यारे ने अपनी चंद बिस्वा जमीन उनके नाम रजिस्ट्री कर दिया। राम प्यारे के जीवन के अंतिम समय में पड़ोसियों ने हिंदू रीति रिवाज के साथ उनकी पूरी देखभाल किया। मरने से पहले उनकी पुत्री को भी बुलवा कर मिलवा दिया गया। तब तक उनका बेटा होने का दावा करने वाले बाबूलाल का कोई अता पता नहीं था।















