1.62 करोड़ के बिजली निगम घोटाले में फर्जी गारंटी का खुलासा, रिकॉर्ड गायब।
संतकबीरनगर। बिजली निगम में 1.62 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें रिकॉर्ड की अनुपस्थिति और फर्जी बैंक गारंटी ने सनसनी फैला दी है। पुलिस की जांच में इस फर्जीवाड़े की परतें खुल रही हैं,
जिसमें तत्कालीन एक्सईएन, तत्कालीन एसडीओ समेत कई बड़े चेहरों का नाम उजागर हुआ है। वर्ष 2012-13 में आरएपीडीआरपी पार्ट बी योजना के तहत खलीलाबाद नगर में विद्युतीकरण कार्य की स्वीकृति मिली थी। वाराणसी बिजली निगम मुख्यालय ने इसकी जिम्मेदारी कोलकाता की मेसर्स बीकोलॉरी प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी। कंपनी ने आधा-अधूरा काम छोड़कर चली गई, इसके बावजूद निगम ने उन्हें 3,11,11,283 रुपये का भुगतान कर दिया। बाद में कार्य प्रभा इलेक्ट्रिकल्स, वाराणसी को सौंपा गया, और बीकोलॉरी को काली सूची में डाल दिया गया। जांच में पाया गया कि 1,62,25,173 रुपये सामग्री आपूर्ति के लिए दिए गए, जिसकी पुष्टि तत्कालीन अवर अभियंता बिपिन कुमार सिंह ने की थी। जांच टीम ने वर्तमान में गोरखपुर में सहायक अभियंता बिपिन कुमार सिंह से अभिलेख मांगे, लेकिन उन्होंने कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया।
इस आधार पर 8 मई 2023 को एसई ने कोतवाली खलीलाबाद में बिपिन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। विवेचक इंस्पेक्टर रामेश्वर यादव ने बताया कि तत्कालीन एक्सईएन की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बिपिन ने कार्यकाल के दौरान कोई सामग्री स्टॉक या वितरण रजिस्टर जमा नहीं किया। एसपी संदीप कुमार मीना ने कहा, “मुकदमे की विवेचना तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। संलिप्त पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।” तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है।















