चमत्कारिक सर्जरी: लकवाग्रस्त पैरों को मिला नया जीवन।
गोरखपुर
गोरखपुर के एम्स में एक ऐसी चिकित्सकीय उपलब्धि हासिल हुई है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए चौरी चौरा निवासी एक व्यक्ति की टूटी हुई रीढ़ की हड्डी को सर्जरी के जरिए ठीक कर उसके लकवाग्रस्त पैरों को फिर से चलने योग्य बनाया गया। इस व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी का लंबर रीजन और वर्टिब्रा कई हिस्सों में टूट गए थे, जिसके कारण वह न सिर्फ चलने-फिरने में असमर्थ हो गया था, बल्कि उसे मूत्र का अहसास भी नहीं हो पा रहा था। लेकिन एम्स के डॉक्टरों की कुशलता और आधुनिक तकनीक ने उसे नया जीवन दे दिया।
दुर्घटना के बाद व्यक्ति के परिजनों ने पहले निजी अस्पताल में इलाज कराया, लेकिन कोई सुधार न होने पर उसे एम्स रेफर किया गया। यहां डॉ. अरुण कुमार और उनकी टीम ने 20 फरवरी को इस जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। सर्जरी में पेडिकिल स्क्रू तकनीक का इस्तेमाल कर टूटे हुए वर्टिब्रा को जोड़ा गया और दबी हुई नसों को भी ठीक किया गया। लंबर रीजन, जो रीढ़ की हड्डी और पैरों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, उसकी मरम्मत ने इस ऑपरेशन को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया था। डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि इस तरह की चोटें आमतौर पर मरीज को जीवनभर के लिए विकलांग बना देती हैं, और सर्जरी के परिणाम को लेकर शुरू में संदेह था। लेकिन उनकी टीम ने तकनीकी कौशल और समर्पण से इसे संभव कर दिखाया।
सर्जरी के बाद नियमित फॉलोअप और देखभाल की बदौलत मरीज डेढ़ महीने में ही चलने-फिरने में सक्षम हो गया। यह न केवल उस व्यक्ति और उसके परिवार के लिए खुशी की बात है, बल्कि चिकित्सा जगत के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है। एम्स की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि सही समय पर सही इलाज और उन्नत तकनीक किसी की जिंदगी को पूरी तरह बदल सकती है। यह कहानी उम्मीद और हौसले की मिसाल है, जो बताती है कि असंभव कुछ भी नहीं।















