टेराकोटा को नई उड़ान देने की तैयारी, कारीगरों को बाजार से जोड़ने पर जोर
ओडीओपी की बैठक में डीएम ने योजनाओं का लाभ दिलाने के दिए निर्देश, ब्रांडिंग, डिजाइन और ऑनलाइन मार्केटिंग बढ़ाने पर जोर
गोरखपुर। गोरखपुर की पहचान बन चुकी टेराकोटा कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने की कवायद तेज हो गई है। गुरुवार को विकास भवन सभागार में आयोजित एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने टेराकोटा से जुड़े कारीगरों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ उत्पादन, गुणवत्ता, डिजाइन, ब्रांडिंग और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टेराकोटा केवल पारंपरिक कला नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार और आय का बड़ा माध्यम बन सकता है।
बैठक में टेराकोटा उद्योग से जुड़े कारीगरों की स्थिति, उत्पादन, प्रशिक्षण, ऋण सुविधा, तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्धता की समीक्षा की गई। डीएम ने अधिकारियों से जानकारी ली कि कितने कारीगर ओडीओपी योजना से जुड़े हैं और कितने पात्र लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि पात्र कारीगरों को चिह्नित कर योजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि पूंजी, तकनीक और बाजार की कमी उनके काम में बाधा न बने।
पारंपरिक कला में आधुनिक डिजाइन का मेल
डीएम ने टेराकोटा उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन में सुधार पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलते बाजार में केवल पारंपरिक उत्पाद तैयार करना पर्याप्त नहीं है। ग्राहकों की पसंद और मांग के अनुरूप नए डिजाइन और उपयोगी उत्पाद विकसित किए जाएं। पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन से जोड़कर ऐसे उत्पाद तैयार किए जाएं, जिनकी मांग देश के बड़े शहरों के साथ ऑनलाइन बाजार में भी बढ़ाई जा सके।
उन्होंने उत्पादों की ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग पर भी जोर दिया। कहा कि पैकेजिंग पर गोरखपुर की टेराकोटा कला की विशिष्ट पहचान और उसकी पारंपरिक विशेषताओं को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए, ताकि देश के दूसरे हिस्सों के ग्राहक भी इसकी पहचान से परिचित हो सकें।
कारीगरों को बाजार से सीधे जोड़ने पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि कारीगरों को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सीधे बाजार और ग्राहकों से जोड़ना जरूरी है। स्थानीय बाजार के अलावा मेलों, प्रदर्शनियों, सरकारी आयोजनों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर टेराकोटा उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जाए। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और कारीगरों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
उन्होंने युवाओं को भी इस पारंपरिक कला से जोड़ने पर जोर दिया। आधुनिक डिजाइन, डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री का प्रशिक्षण देकर युवाओं के लिए टेराकोटा के क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
प्रशिक्षण का लाभ उत्पादन में दिखे
बैठक में कारीगरों के प्रशिक्षण पर भी चर्चा हुई। आधुनिक तकनीक, नए डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने पर जोर दिया गया। डीएम ने कहा कि प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए। इसका असर कारीगरों के उत्पादन, गुणवत्ता और आय में दिखाई देना चाहिए।
मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने भी अधिकारियों को ओडीओपी योजना के कार्यों की नियमित निगरानी करने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कारीगरों को प्रशिक्षण, ऋण, तकनीकी सहायता और विपणन की सुविधाएं समय से उपलब्ध कराई जाएं।
पर्यटन से जोड़कर बढ़ाई जाएगी बिक्री
बैठक में टेराकोटा को गोरखपुर के पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। गोरखपुर आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच टेराकोटा उत्पादों को स्थानीय पहचान के रूप में बढ़ावा देने, प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बिक्री एवं प्रदर्शन के अवसर तलाशने पर जोर दिया गया।
डीएम ने कहा कि ओडीओपी योजना का उद्देश्य स्थानीय उत्पाद को पहचान दिलाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाना है। इसलिए कारीगरों को आवेदन से लेकर योजना का लाभ मिलने तक अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। योजनाओं की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।















