वृंदावन दर्शन को निकला परिवार कभी लौटकर नहीं आया, एक्सप्रेसवे हादसे में पांच की मौत आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, संतकबीरनगर के एक ही परिवार की खुशियां उजड़ीं

वृंदावन दर्शन को निकला परिवार कभी लौटकर नहीं आया, एक्सप्रेसवे हादसे में पांच की मौत

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, संतकबीरनगर के एक ही परिवार की खुशियां उजड़ीं

उन्नाव/संतकबीरनगर। वृंदावन में ठाकुर जी के दर्शन की आस्था लेकर घर से निकला संतकबीरनगर का एक परिवार कभी वापस नहीं लौट सका। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे ने एक ही परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए छीन लिया। दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम दिखाई दे रही है।

जानकारी के अनुसार, संतकबीरनगर जिले के बढ़या बाबू गांव निवासी परिवार अपने एक परिचित की अर्टिगा कार से वृंदावन दर्शन के लिए निकला था। मंगलवार सुबह करीब चार बजे उन्नाव जिले के बांगरमऊ क्षेत्र में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर पीछे से आ रही तेज रफ्तार बस ने कार में जोरदार टक्कर मार दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भीषण थी कि कार अनियंत्रित होकर एक्सप्रेसवे से नीचे जा गिरी और कई बार पलटती चली गई। हादसे के बाद वाहन करीब 20 फीट तक घिसटता रहा और उसके परखच्चे उड़ गए। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई।

इस हृदयविदारक हादसे में विनोद (45 वर्ष), अंजू (40 वर्ष), छह वर्षीय दिव्या, 13 वर्षीय अमृता और 60 वर्षीय गुनगुन की मौके पर ही मौत हो गई। एक ही परिवार के पांच सदस्यों की असमय मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

पुलिस के अनुसार, कार में कुल नौ लोग सवार थे, जबकि बिहार नंबर की बस में लगभग 70 यात्री यात्रा कर रहे थे। हादसे में कार सवार चार और बस सवार चार यात्री घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों और कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि बस चालक नशे की हालत में था तथा उसे झपकी आने के कारण हादसा हुआ। हालांकि पुलिस ने कहा है कि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकेगी। पुलिस ने बस और चालक को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार, चालक की लापरवाही और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कुछ ही क्षणों में एक हंसता-खेलता परिवार बिखर गया और वृंदावन की आस्था से जुड़ी यात्रा उनकी जीवन की अंतिम यात्रा बन गई।

गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। जिन घरों में धार्मिक यात्रा को लेकर उत्साह और खुशियां थीं, वहां अब सन्नाटा और चीख-पुकार है। हर कोई बस यही कह रहा है काश यह सफर शुरू ही न हुआ होता।

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