सम्पूर्ण समाधान दिवस में मण्डलायुक्त की सख्ती, कई अधिकारी अनुपस्थित; वेतन रोकने के निर्देश
सहजनवां तहसील का औचक निरीक्षण, शिकायतों के त्वरित व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर दिया जोर
गोरखपुर। सहजनवां तहसील में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस का शनिवार को मण्डलायुक्त अनिल ढींगरा और पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) एस. चन्नप्पा ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई विभागों के अधिकारी अनुपस्थित पाए गए, जिस पर मण्डलायुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए।
निरीक्षण में खंड शिक्षा अधिकारी पाली/पिपरौली, सीडीपीओ सहजनवां, चकबंदी अधिकारी सहजनवां, सहायक अभियंता लोक निर्माण विभाग, पशु चिकित्साधिकारी सहजनवां, पिपरौली एवं पाली तथा सहायक अभियंता ड्रेनेज सिंचाई विभाग अनुपस्थित मिले। इस पर मण्डलायुक्त ने नाराजगी जताते हुए सभी अनुपस्थित अधिकारियों के विरुद्ध वेतन रोकने की कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में समाधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से अनुपस्थित रहने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मण्डलायुक्त ने जिलाधिकारी स्तर से सहजनवां तहसील के लिए अपर जिलाधिकारी स्तर के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने का निर्देश भी दिया, ताकि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
डीआईजी एस. चन्नप्पा ने पुलिस से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि फरियादियों की शिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के निस्तारण में किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
सम्पूर्ण समाधान दिवस में राजस्व एवं भूमि विवाद से जुड़े कई मामलों की सुनवाई की गई। प्रमोद कुमार, सरस्वती देवी, भजुराम, संतोष पाण्डेय समेत अन्य फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए मण्डलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उपजिलाधिकारी सहजनवां केशरी नन्दन तिवारी को निर्देशित किया गया कि सभी प्राप्त शिकायतों के निस्तारण के लिए टीम गठित कर प्रत्येक मामले का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक सख्ती स्पष्ट दिखाई दी। मण्डलायुक्त ने कहा कि समाधान दिवस शासन की प्राथमिकता वाला कार्यक्रम है और इसमें आम जनता की समस्याओं का तत्काल समाधान होना चाहिए। इस निरीक्षण को अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।















