सूर्या के वार्षिकोत्सव में ‘मिनी इंडिया’ की झलक, डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी के संकल्पों से संवर रहा नौनिहालों का भविष्य

संतकबीरनगर। जिले के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान सूर्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल, खलीलाबाद का 13वां वार्षिकोत्सव बुधवार को अपार उत्साह, संस्कार और देशभक्ति की भावना से संपन्न हुआ। संस्थान के चेयरमैन डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी ने मंच से अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सूर्या ग्रुप न केवल नौनिहालों के बचपन को संवार रहा है, बल्कि उनके कैरियर को वैश्विक स्तर पर निखारने के लिए पूर्णतः संकल्पित है। उन्होंने अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि हर छात्र को एक सफल, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक बनाने में संस्थान कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी ने कार्यक्रम की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को किताबी शिक्षा के साथ जीवन जीने की शैली, परिवार-समाज से संवाद और हर परिस्थिति में संतुलित रहने की कला सिखानी होगी। उन्होंने सूर्या के छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों को अद्भुत और प्रेरणादायी बताया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. ओपी पांडेय ने डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में सूर्या को ‘बेस्ट परफॉर्मर्स’ के साथ-साथ अनुशासित और संस्कारित नागरिक तैयार करने का केंद्र बताया। प्रो. जितेंद्र मिश्र ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों पर अपनी मर्जी न थोपें, बल्कि उन्हें स्वच्छंद रूप से अपना भविष्य चुनने का अवसर दें और सही मार्गदर्शन देते रहें।
मंच पर जब छात्र-छात्राओं ने बिहार, असम, पंजाब, राजस्थान और भोजपुरी की लोक संस्कृतियों को जीवंत किया, तो पूरा कैंपस तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। यह ‘मिनी इंडिया’ की झलक देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी एवं अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती एवं संस्थापक स्व. पंडित सूर्य नारायण चतुर्वेदी की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन व माल्यार्पण कर किया। इस दौरान एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सविता चतुर्वेदी, एमडी राकेश चतुर्वेदी, डायरेक्टर शिखा चतुर्वेदी, प्रधानाचार्य रविनेश श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव, दानिश खान, पुष्कर चौधरी सहित सैकड़ों अभिभावक, शिक्षक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समारोह का कुशल संचालन उप-प्रधानाचार्य शरद त्रिपाठी ने किया। शिक्षा, संस्कार और देशभक्ति की त्रिवेणी में डूबा यह उत्सव सूर्या परिवार की विचारधारा और प्रतिबद्धता का जीता-जागता प्रमाण बना।















