राणा बेनी माधव की 221वीं जयंती पर भाव समर्पण, बच्चों और विशिष्टजनों का सम्मान
रायबरेली। 24 अगस्त 2025 को फिरोज गांधी कॉलेज सभागार में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक राणा बेनी माधव बक्श सिंह की 221वीं जयंती पर राणा बेनी माधव बक्श सिंह स्मारक समिति द्वारा भाव समर्पण व सम्मान समारोह आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि राज्य मंत्री (लोक निर्माण विभाग) कुंवर बृजेश सिंह ने राणा की अश्वरोही प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया और बैसवारा क्षेत्र की 100 विशिष्ट विभूतियों व प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया।
राणा की गौरव गाथा का गुणगान जरूरी: मंत्री
राज्य मंत्री कुंवर बृजेश सिंह ने कहा कि राणा बेनी माधव की वीरता और बलिदान की गाथा को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि 1857 की क्रांति में दिल्ली, कानपुर और लखनऊ की पराजय के बाद भी राणा ने लॉर्ड कैनिंग के सामने समर्पण नहीं किया। तात्या टोपे के साथ वे सच्चे स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने समिति की स्मारक निर्माण की पहल की सराहना की और शंकरपुर सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव जल्द पास कराने का आश्वासन दिया।
1857 की क्रांति में राणा का योगदान
सदर विधायक अदिति सिंह ने कहा कि 1857 में राणा बेनी माधव ने अवध में अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया। उनके साथ वीर सेनानी वीरा पासी ने आंदोलन को गति दी। यह बलिदान 90 वर्षों तक चली आजादी की लड़ाई का आधार बना। समिति अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह आयोजन युवा पीढ़ी को राणा के बलिदान से प्रेरित करने के लिए है। सभागार निर्माण पूरा होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका उद्घाटन करेंगे।
बच्चों और समितियों का सम्मान
कार्यक्रम में चित्रकला और डिबेट प्रतियोगिताओं में विजेता बच्चों को सम्मानित किया गया। चित्रकला में प्ले ग्रुप से अरवी (हेमकुंड पब्लिक स्कूल), कक्षा 1-2 से संध्या वर्मा (केंद्रीय विद्यालय), कक्षा 3-5 से आराध्य यादव (बीएसएस), और ऑपरेशन सिंदूर ग्रुप से शताक्षी वत्स (सेंट पीटर्स स्कूल) को पुरस्कृत किया गया। डिबेट में रुद्र प्रताप सिंह और सेजल सिंह को प्रथम स्थान मिला। समन्वय, स्वास्थ्य, रक्तदान, पौधरोपण, और दीपदान समितियों के सदस्यों को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
प्रदर्शनी का अवलोकन
मुख्य अतिथि ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें राणा बेनी माधव की जीवनी, रायबरेली के ऐतिहासिक स्थल, और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं प्रदर्शित थीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को राणा के शौर्य से प्रेरित करेंगे।















