गीडा सेक्टर-5 के पार्कों की दुर्दशा, आवंटियों का गुस्सा।
गोरखपुर। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के सेक्टर-5 में आवासीय पार्कों की बदहाली ने आवंटियों का सब्र तोड़ दिया है। औद्योगिक विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच गीडा की लापरवाही साफ झलक रही है। सेक्टर-5 के चार पार्क झाड़-झंखाड़ और गंदगी के अड्डे बन चुके हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में गुस्सा पनप रहा है। आवंटियों का कहना है कि गीडा उनसे मेंटेनेंस शुल्क तो वसूलता है, लेकिन बदले में बुनियादी सुविधाएं भी नहीं देता।
पार्कों की हालत इतनी खस्ता है कि वहां लगे उपकरण टूट चुके हैं, गेट जर्जर हो गए हैं, और चारों ओर जंगली झाड़ियां उग आई हैं। ये पार्क न बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित हैं, न ही बुजुर्गों के टहलने के लिए। झाड़ियों की वजह से सांप-बिच्छू और अपराध की आशंका बनी रहती है, जिससे लोग पार्कों में जाने से कतराते हैं। आवंटियों ने कई बार गीडा के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। एक निवासी ने गुस्से में कहा, “हमसे हर साल हजारों रुपये लिए जाते हैं, लेकिन पार्कों की हालत देखकर लगता है कि पैसा हवा में उड़ रहा है।”
गीडा, जो 13,135 एकड़ में 32 सेक्टरों के विकास का दावा करता है, अपने ही आवासीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं देने में नाकाम साबित हो रहा है। सेक्टर-5 के निवासियों का आरोप है कि गीडा का ध्यान सिर्फ औद्योगिक परियोजनाओं, जैसे प्लास्टिक पार्क और गारमेंट पार्क, पर है, जबकि आवासीय सेक्टर उपेक्षित हैं।
आवंटियों ने गीडा से मांग की है कि पार्कों की तत्काल मरम्मत, झाड़ियों की सफाई, और नियमित रखरखाव की व्यवस्था की जाए। गीडा की इस लापरवाही ने न केवल उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि अन्य आवासीय सेक्टरों में भी ऐसी समस्याओं की आशंका जताई जा रही है।















