विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखा, 15 जुलाई को आगरा में उठाएगी मुद्दा
गोरखपुर। सोमवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, गोरखपुर ने झूठे आंकड़ों, धमकी, और दमन के आधार पर निजीकरण की साजिश को कामयाब नहीं होने देने का संकल्प लिया। समिति के पदाधिकारियों ने आज 229वें दिन प्रांतीय विरोध प्रदर्शन जारी रखा और आगरा में 15 जुलाई को नियामक आयोग की टैरिफ सुनवाई के दौरान दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण को निरस्त करने की मांग उठाने की घोषणा की।संघर्ष समिति के नेताओं, जिसमें इस्माइल खान, इंजीनियर पुष्पेंद्र सिंह, जीवेश नंदन, जितेंद्र कुमार गुप्त, शिवम चौधरी, अमित यादव, विजय सिंह, प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, संदीप श्रीवास्तव, श्याम सिंह, एनके सिंह, मनोज यादव, राकेश चौरसिया, विजय बहादुर सिंह, करुणेश त्रिपाठी, और राजकुमार सागर शामिल हैं, ने आरोप लगाया कि निजी घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए वितरण निगम ने निजीकरण से पहले टैरिफ में 45% वृद्धि का प्रस्ताव भेजा है, जो बिजली दरों में भारी इजाफे का संकेत है।समिति ने दावा किया कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में 5,706 करोड़ रुपये की सब्सिडी विभिन्न उपभोक्ताओं को दी जाती है, जिसमें किसानों, बुनकरों, और गरीब घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 4,692 करोड़ (टैरिफ), 99 करोड़ (निजी नलकूप), और 23 करोड़ (बुनकर) शामिल हैं।
पावर कारपोरेशन प्रबंधन इसे कैश गैप में जोड़कर घाटा दिखा रहा है, जो सब्सिडी खत्म करने की साजिश हो सकती है। वहीं, 2024-25 में 11,546 करोड़ रुपये राजस्व वसूली और 4,543 करोड़ रुपये सरकारी बकाया जोड़ने पर कुल आय 21,795 करोड़ रुपये हो जाती है, जो 19,639 करोड़ रुपये खर्च के मुकाबले 2,156 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्शाती है। फिर भी, झूठे आंकड़ों से घाटा दिखाकर निजीकरण को जायज ठहराया जा रहा है।इंजीनियर पुष्पेंद्र सिंह ने आगरा निजीकरण मॉडल को पावर कारपोरेशन और प्रदेश की जनता पर वित्तीय बोझ बताया। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2010 को टोरेंट पावर को सौंपी गई आगरा व्यवस्था से कारपोरेशन को 14 वर्षों में 2,434 करोड़ रुपये की हानि और 7,000 करोड़ रुपये राजस्व क्षति हुई। 2023-24 में टोरेंट ने 800 करोड़ का मुनाफा कमाया, जबकि कारपोरेशन को 1,000 करोड़ का लाभ हो सकता था। साथ ही, टोरेंट ने 2,200 करोड़ रुपये बकाया नहीं चुकाया और किसानों को मुफ्त बिजली नहीं दे रही, साथ ही कनेक्शन के लिए 9 लाख रुपये तक का अनुमान वसूल रही है।संघर्ष समिति ने निजीकरण विरोधी आंदोलन को जारी रखने का ऐलान किया और कहा कि जब तक निर्णय वापस नहीं लिया जाता, संघर्ष जारी रहेगा।
आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी, और अनपरा में विरोध सभाएं हुईं।















