10 दिन के नवजात की आंतों की जटिल सर्जरी, मां का दूध बताया जरूरी।
गोरखपुर: सिधारी गांव के छोटू और चांदनी के 11 जून को जन्मे नवजात बेटे की जान शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में जटिल सर्जरी से बची। गोला के एक निजी अस्पताल में जन्म के बाद बच्चे को 16 जून को छुट्टी मिली, लेकिन बाजार का दूध पिलाने से उसका पेट फूलने और मल त्याग रुकने की समस्या शुरू हुई। गोला अस्पताल ने उसे बड़हलगंज के चौबे हॉस्पिटल रेफर किया, जहां से गंभीर हालत में 20 जून को शाही ग्लोबल हॉस्पिटल लाया गया।
एनआईसीयू में भर्ती बच्चे की जांच में “नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस” (एनईसी) और “मालरोटेशन ऑफ गट” का पता चला। यह स्थिति आंतों में रुकावट और सड़न के कारण जानलेवा थी। मुख्य चिकित्सक डॉ. शिवशंकर शाही और एनेस्थेटिस्ट डॉ. भूपेंद्र प्रताप सिंह ने 10 दिन के बच्चे की जटिल सर्जरी की। सड़ी हुई छोटी आंत को हटाकर मल त्याग का वैकल्पिक रास्ता बनाया गया। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद नायक की देखरेख में इलाज के बाद बच्चा अब मां का दूध पी रहा है और जल्द छुट्टी मिलेगी। एक साल बाद दोबारा सर्जरी से आंतों को सामान्य किया जाएगा।
डॉ. शाही ने बताया कि एनईसी कम वजन वाले या फॉर्मूला फीड दिए गए नवजातों में आम है। उन्होंने जोर देकर कहा, “6 महीने तक केवल मां का दूध ही बच्चे को देना चाहिए। बाजार का दूध, फॉर्मूला, पानी, शहद या घुट्टी से बीमारियों का खतरा बढ़ता है। मां का दूध बच्चे की जरूरतों के अनुसार बदलता है, जो प्रकृति का करिश्मा है।” मां का दूध इम्यूनिटी बढ़ाता है, निमोनिया और डायरिया से बचाता है, और जीवन भर स्वास्थ्य लाभ देता है।















