190वें दिन भी बिजली कर्मियों का जोरदार प्रदर्शन, निजीकरण के खिलाफ चेतावनी।
गोरखपुर: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, गोरखपुर ने 190वें दिन भी प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रखा। समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर निजी घरानों से साठगांठ कर 42 जनपदों में बिजली का निजीकरण करने का आरोप लगाया। समिति ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण के नाम पर अभियंताओं को अनावश्यक दंडित किया गया तो इसका तीखा जवाब दिया जाएगा।
समिति के पदाधिकारियों इं. पुष्पेंद्र सिंह, इं. जीवेश नंदन, इं. जितेंद्र कुमार गुप्ता, प्रभुनाथ प्रसाद, संगमलाल मौर्य, इस्माइल खान, संदीप श्रीवास्तव, विकास श्रीवास्तव, जगन्नाथ यादव, राकेश चौरसिया, राजकुमार सागर, विजय बहादुर सिंह, करुणेश त्रिपाठी, ओम गुप्ता, सत्यव्रत पांडे, जे.ई. संगठन के इं. शिवम चौधरी, इं. अमित यादव, इं. विजय सिंह, इं. प्रमोद यादव और इं. रणंजय पटेल ने कहा कि प्रबंधन निदेशक वित्त निधि नारंग के जरिए चेयरमैन और कॉरपोरेट घरानों के बीच सेतु बन रहा है। एक बड़े कॉरपोरेट घराने के प्रबंध निदेशक ने दावा किया कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट उनकी सलाह से तैयार हुआ।
समिति के संरक्षक इस्माइल खान ने बताया कि 2017 में 41% से घटकर 2024 में एटीएंडसी हानियां 16.5% हो गईं, लेकिन 2025-26 के लिए पावर कॉरपोरेशन ने पूर्वांचल में हानियां 18.49% से बढ़ाकर 36.08% और दक्षिणांचल में 18.97% से बढ़ाकर 28.48% दिखाई हैं। उन्होंने सवाल किया कि आरडीएसएस स्कीम में हजारों करोड़ खर्च के बाद हानियां कैसे बढ़ीं? यह निजी घरानों को लाभ पहुंचाने की साजिश है।
सहसंयोजक प्रभुनाथ प्रसाद ने कहा कि चेयरमैन ने अभियंताओं को नगरीय क्षेत्र से स्थानांतरित करने की धमकी दी है। कार्यकारी संयोजक इं. जीवेश नंदन ने बताया कि वाराणसी में 6 अभियंताओं का दंडात्मक स्थानांतरण हुआ। समिति ने मांग की कि ये स्थानांतरण और चार्जशीट वापस लिए जाएं, वरना प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा, जिसकी जिम्मेदारी चेयरमैन की होगी।















