हत्या केस में विवेचना पर सवाल, तीन आरोपियों के नाम हटाए।

हत्या केस में विवेचना पर सवाल, तीन आरोपियों के नाम हटाए।

 

संतकबीरनगर: खलीलाबाद के गड़सरपार चौराहे पर 25 फरवरी 2025 को हुए हासिम खान हत्याकांड ने पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मदरसे के विवाद में 24 वर्षीय हासिम, पुत्र अमानुल्लाह खान, की स्कॉर्पियो सवार हमलावरों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। पिता अमानुल्लाह को भी हॉकी और डंडों से बेरहमी से पीटा गया। इस दिल दहलाने वाली घटना ने पीड़ित परिवार को झकझोर कर रख दिया। पिता की आंखों के सामने बेटे की जान चली गई, और अब विवेचना में कथित लापरवाही ने उनके जख्मों को और गहरा कर दिया है।

मामले में अमानुल्लाह ने नाजिम खान, उनके भाई जाकिर, मां शाहजहां, इसराइल और चार अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने शुरूआती जांच में चार आरोपियों को जेल भेजा, लेकिन एक आरोपी अभी भी फरार है। विवेचना के दौरान पुलिस ने सलमान अंसारी, तबरेज उर्फ बादशाह (मियां मंझरिया), रामरतन यादव उर्फ भूवर (भैंसहिया), और सहबाज (कविता, थाना दुधारा) को अभियुक्त बनाया। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह रही कि नामजद आरोपियों इसराइल, शाहजहां, और जाकिर की संलिप्तता नहीं पाए जाने का हवाला देकर उनके नाम मुकदमे से हटा दिए गए। इस फैसले ने पीड़ित पिता अमानुल्लाह को गहरे सदमे में डाल दिया, जिन्होंने विवेचना की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए डीआईजी और एसपी से गुहार लगाई।

अमानुल्लाह की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 16 मई 2025 को विवेचना कोतवाल से छीनकर क्राइम ब्रांच को सौंप दी। एसपी ने क्राइम ब्रांच प्रभारी को निर्देश दिए कि वह वादी के हितों को ध्यान में रखते हुए वैधानिक और निष्पक्ष जांच करें। साथ ही, गुण-दोष के आधार पर विधिक निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। एएसपी की जांच में पाया गया कि साक्ष्यों के आधार पर कुछ नए अभियुक्तों के नाम सामने आए, जबकि तीन नामजद आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध नहीं हुई। इसके बाद विवेचक ने नाजिम खान, सलमान अंसारी, रामरतन यादव, और तबरेज के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। हालांकि, सहबाज की गिरफ्तारी न हो पाने के कारण उसकी जांच अभी प्रचलित है।

इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित पिता का कहना है कि उनके बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने में देरी और विवेचना में बदलाव ने उनके न्याय की उम्मीद को धूमिल किया है। स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश है। गड़सरपार चौराहे पर सरेआम हुई इस वारदात ने क्षेत्र में दहशत फैला दी थी। अब क्राइम ब्रांच की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं। क्या पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलेगा, या विवेचना की खामियां हत्यारों को बचाने का रास्ता बनाएंगी? यह सवाल हर किसी के मन में कौंध रहा है।

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