रिक्रूट बनेंगे हाईटेक: फोरेंसिक, साइबर क्राइम और अभियोजन की ट्रेनिंग।
संतकबीरनगर: उत्तर प्रदेश पुलिस के 60,244 नवनिर्वाचित सिपाहियों को अब हाईटेक पुलिसिंग के लिए तैयार किया जाएगा। बस्ती परिक्षेत्र के संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर और बस्ती में 800 रिक्रूट्स को फोरेंसिक साइंस, साइबर क्राइम और अभियोजन की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रशिक्षण अवधि छह से बढ़ाकर नौ महीने कर दी गई है, जिसमें स्मार्ट क्लास और बदले हुए शारीरिक प्रशिक्षण का समावेश होगा।
लखनऊ में डीजी ट्रेनिंग त्रिलोत्मा वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। एएसपी सुशील कुमार सिंह ने बताया कि रिक्रूट्स को आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करने हेतु लखनऊ ट्रेनिंग सेंटर में टेक्निकल एक्सपर्ट्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है। पारंपरिक प्रशिक्षण में बदलाव के साथ मानव व्यवहार और डिजिटल कर्मयोगी कोर्स को भी शामिल किया गया है।
बस्ती परिक्षेत्र के डीआईजी दिनेश कुमार पी ने कहा कि प्रशिक्षण केंद्रों की कमियों को दूर कर व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। संतकबीरनगर में 316 पुरुष और 79 महिला रिक्रूट्स को एक महीने की जूनियर ट्रेनिंग कोर्स (जेटीसी) दी जाएगी, जबकि 300 रिक्रूट्स की रिजर्व ट्रेनिंग कोर्स (आरटीसी) चलेगी। बस्ती में 200 और सिद्धार्थनगर में 300 रिक्रूट्स प्रशिक्षण लेंगे।
आरटीसी की शुरुआत 21 जुलाई 2025 से प्रस्तावित है, जबकि जेटीसी 17 जून 2025 से शुरू होगी। आरटीसी प्रभारी इंस्पेक्टर रैंक के होंगे, और इनडोर-आउटडोर प्रशिक्षण के लिए सब-इंस्पेक्टर नियुक्त किए जाएंगे। पुलिस लाइंस में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।
यह प्रशिक्षण रिक्रूट्स को साइबर अपराधों की जांच, फोरेंसिक साक्ष्यों के विश्लेषण और अभियोजन प्रक्रिया में दक्ष बनाएगा। शारीरिक प्रशिक्षण में बदलाव के साथ मानव व्यवहार पर आधारित मॉड्यूल भी जोड़ा गया है, ताकि पुलिसकर्मी जनता के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर सकें। डिजिटल कर्मयोगी कोर्स के माध्यम से तकनीकी कौशल को और निखारा जाएगा।
बस्ती परिक्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। संतकबीरनगर में 300 रिक्रूट्स की आरटीसी के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशिक्षण के दौरान रिक्रूट्स को स्मार्ट क्लास में पढ़ाई और प्रायोगिक प्रशिक्षण का लाभ मिलेगा।
यह नया प्रशिक्षण मॉडल न केवल पुलिस बल को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि अपराधों से निपटने में उनकी क्षमता को भी बढ़ाएगा। हाईटेक पुलिसिंग की दिशा में यह कदम उत्तर प्रदेश पुलिस को और सक्षम और जवाबदेह बनाएगा।















