बारिश की बेरहमी: किसानों का दर्द गहराया, सरकार से उम्मीदें बंधीं
गोरखपुर
गोरखपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में बीती रात से जारी तेज बारिश और आंधी-तूफान ने किसानों के सपनों को तार-तार कर दिया है। कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसलें अब खेतों में बिछी पड़ी हैं, मानो मेहनत की सारी कहानी मौसम की मार में धुल गई हो। सहजनवा, पिपरौली, नेवास कुसमी, बरवार कुसुम और जैतपुर जैसे गांवों में किसानों की उम्मीदों पर ग्रहण लग गया है। मजदूरों और उपकरणों की पहले से चली आ रही किल्लत के बीच यह प्राकृतिक आपदा उनके लिए काल बनकर आई। फसलों को हुआ नुकसान इतना भयावह है कि अब यह चिंता सताने लगी है कि कटाई के बाद भी ये गेहूं खाने लायक बचेंगे या नहीं।
किसानों की पीड़ा उनकी बातों में साफ झलकती है। बृज किशोर जैसे किसान कहते हैं, “इस बारिश ने हमारी सारी उम्मीदें मिट्टी में मिला दीं। सालभर की मेहनत और लागत सब बर्बाद हो गई।” ध्रुव नामक एक अन्य किसान की व्यथा भी कम नहीं, “पैदावार पहले ही कम थी। फसल कटवाने की कोशिश जारी थी, लेकिन अब सब तबाह हो गया। डर है कि जो बचेगा, वह भी बेकार न हो जाए।” जैतपुर के किसानों का भी यही हाल है। उनके चेहरों पर निराशा और मन में अनिश्चितता का साया मंडरा रहा है। यह संकट सिर्फ फसलों का नहीं, बल्कि उन परिवारों की रोजी-रोटी का है, जो खेती से ही जीते हैं।
इस विपदा के बीच सरकार से राहत की उम्मीद जगी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के ट्वीट के मुताबिक,
@myogiadityanath
ने बारिश, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान और वज्रपात से प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारियों को राहत कार्यों में जुटने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों से क्षेत्रों का दौरा कर किसानों की तुरंत सहायता करने, जनहानि और पशुहानि के मामलों में आर्थिक मदद देने का आदेश दिया है। साथ ही, मंडियों में क्रय किए गए गेहूं को बाहर न रखने की हिदायत दी गई, ताकि नुकसान और न बढ़े।
किसानों की निगाहें अब सरकारी सहायता पर टिकी हैं। अगर राहत कार्य तेजी से अमल में आए, तो शायद कुछ घावों पर मरहम लग सके। मगर मेहनत के इस तरह बेकार होने का दर्द उनके दिलों से जल्दी नहीं मिटेगा।















