प्रतिष्ठित स्कूल का बच्चों पर तुगलगी फरमान,अभिभावक हैरान।

प्रतिष्ठित स्कूल का बच्चों पर तुगलगी फरमान,अभिभावक हैरान।

   – प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ने वाले दो सगे भाईयों को शिक्षिका ने टीका लगाने से किया मना

     – बच्चों के बताने पर पिता मामले की शिकायत करने पहुंच गए स्कूल

  – प्रबंधतंत्र ने समुचित जवाब देने की बजाय अभिभावक को सुरक्षा कर्मियों से दिखवाया बाहर का रास्ता

  – पीड़ित अभिभावक डीएम से शिकायत करने पहुंच गया कलेक्ट्रेट

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 संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर में संचालित एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ने वाले दो सगे भाईयों को तुगलगी फरमान सुनाया गया। वजह यह है रहा कि दोनों भाई घर से टीका लगाकर पढ़ने स्कूल चले गए थे। शिक्षिका ने दोनों भाईयों को आगे से टीका लगा कर स्कूल नहीं आने का निर्देश दिया। बच्चों ने घर पर पहुंच कर अपने पिता को जानकारी दी। बुधवार को पिता स्कूल पहुंच गया और प्रबंधतंत्र से मामले की शिकायत की तो उसे समुचित जवाब देने की बजाय सुरक्षा कर्मियों से गेट से बाहर करा दिया गया। इससे क्षुब्ध पिता डीएम से शिकायत करने कलेक्ट्रेट पहुंच गया। पीड़ित पिता की फरियाद है कि तुगलगी फरमान सुनाने वाले विद्यालय की उक्त शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की जाए और प्रबंधतंत्र को उचित दिशा निर्देश देकर आगे के लिए ताकीद किया जाए। जैसे ही घटना की चर्चा शहर में फैली,वैसे ही लोग उक्त प्रतिष्ठित स्कूल के तुगलगी फरमान की थू-थू कर रहे है। 

      महुली थाना क्षेत्र के लुतुही गांव के रहने वाले राजकुमार दूबे का आरोप है कि उनका बेटा शुभ दूबे कक्षा चार में और प्रियल कक्षा तीन में खलीलाबाद शहर के प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ते है। उनके बच्चे घर से पूजा पाठ करके टीका लगाकर पढ़ने स्कूल गए थे। आरोप है कि स्कूल की एक शिक्षिका ने बच्चों को टीका लगाकर आने की वजह से फटकार लगाई और आगे से टीका लगाकर न आने की हिदायत दी। बच्चे घर पर पहुंच कर मामले की जानकारी दिए। जिसकी शिकायत लेकर वह स्कूल में गए और प्रबंध निदेशिका से शिकायत किए तो उन्हें समुचित जवाब नहीं दी और ऊंची आवाज में अपने बेटे को बुलाने की धमकी तक दे डाली। इसी बीच उनके सुरक्षा कर्मी पहुंच गए और उन्हें गेट से बाहर का रास्ता दिखा दिए। इससे उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उनका सवाल है कि आखिर बच्चे टीका लगाकर स्कूल क्यों नहीं जा सकते। क्या ऐसा कोई शासन अथवा स्कूल की तरफ से निर्देश जारी हुआ है। यदि ऐसा नहीं है तो उनके बच्चों को आखिर टीका लगाने से क्यो रोका जा रहा है। इस तुगलगी फरमान को रोकने के लिए और उक्त शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन- प्रशासन का दरवाजा खटखटाएंगे। शिकायत करने कलेक्ट्रेट पहुंचे राज कुमार दूबे किन्हीं कारणों से डीएम से नहीं मिल पाए,मगर मीडिया से मुखातिब हुए और अपना पक्ष दमदारी से रखे। मीडिया से भी ऐसे तुगलगी फरमान पर विराम लगवाने में आगे आने की पेशकश की। यह मामला शहर से लेकर कर गांव तक सुर्खियों में आ गया है। लोग उक्त शिक्षिका और प्रबंधतंत्र की ऐसी सोच को गलत ठहरा रहे है। 

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     प्रबंधतंत्र का पक्ष—-

इस संबंधन में प्रबंध तंत्र से इस मसले को लेकिन वार्ता नहीं हो पाई जैसे ही इनका पक्ष आएगा उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

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