वन स्टॉप सेंटर में विधि छात्र-छात्राओं को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत महिला अधिकार, विधिक सहायता और संरक्षण सेवाओं की दी गई जानकारी

वन स्टॉप सेंटर में विधि छात्र-छात्राओं को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत महिला अधिकार, विधिक सहायता और संरक्षण सेवाओं की दी गई जानकारी

संतकबीरनगर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित इंटर्नशिप कार्यक्रम के अंतर्गत विधि छात्र-छात्राओं को वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यह कार्यक्रम जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष रणधीर सिंह के निर्देशन तथा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव एवं अपर जिला जज (फास्ट ट्रैक कोर्ट) दिव्यानंद की पहल पर आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ अन्जय कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में किया गया। इस दौरान वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक रितिका दुबे, परामर्शदात्री पूनम शुक्ला तथा समन्वयक मोनिका शुक्ला ने छात्र-छात्राओं को केंद्र की स्थापना, उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

प्रशिक्षकों ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए एकीकृत सहायता केंद्र के रूप में कार्य करता है, जहां हिंसा या उत्पीड़न से प्रभावित महिलाओं को एक ही स्थान पर कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श, चिकित्सीय सहायता, अस्थायी आश्रय तथा अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

कार्यक्रम में महिलाओं के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों, महिला सुरक्षा कानूनों तथा पीड़ित सहायता तंत्र की भी विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक रामभवन चौधरी, विनय कुमार, मुलायम यादव एवं बलदेव ने निःशुल्क विधिक सहायता योजनाओं और प्राधिकरण की विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों से छात्रों को अवगत कराया।

इंटर्नशिप कार्यक्रम में नेहा कनौजिया, मोना, सुष्मिता, प्रेमलता यादव, शिवांगी, रागिनी, बबीता, श्रेया पांडे, रवि प्रजापति, रोहन राजभर, मोहम्मद शादाब, विशाल कुमार, मंशा, समीक्षा, प्रदीप कुमार, दयाशंकर और मोहम्मद आदिल सहित अनेक विधि छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली को महिलाओं के संरक्षण, सहायता एवं सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विधि शिक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

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