नीति आयोग की ‘विकसित भारत रणनीति कक्ष’ में डीएम देवरिया की सशक्त भागीदारी।
नई दिल्ली। नीति आयोग की ‘विकसित भारत रणनीति कक्ष’ में देशभर से चयनित जिलाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ देवरिया की जिलाधिकारी (डीएम) दिव्या मित्तल ने भाग लिया। इस अनूठे मंच पर डेटा-आधारित आधुनिक उपकरणों के उपयोग से नीतियों को प्रभावी बनाने और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने की प्रक्रिया को देखना उनके लिए प्रेरणादायक रहा। डीएम मित्तल ने अपने क्षेत्रीय अनुभव और सुझाव साझा किए, जिससे नीतियां जन-केंद्रित और अधिक प्रभावशाली बन सकें।
डीएम मित्तल ने बताया कि यह अनुभव उनके लिए सीख और प्रेरणा से परिपूर्ण था। नीति आयोग का यह मंच डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के जरिए नीतियों को न केवल डिजाइन करने, बल्कि उनके कार्यान्वयन को भी प्रभावी बनाने का एक नायाब उदाहरण है। उन्होंने कहा, “डेटा-आधारित निर्णय लेने से न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है, बल्कि जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में पारदर्शिता और गति आती है।”
देवरिया में डीएम मित्तल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में कई नवाचार लागू किए हैं। उनके सुझावों में ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर डेटा संग्रह को मजबूत करने और योजनाओं की निगरानी के लिए तकनीक का अधिक उपयोग शामिल था। इन सुझावों को नीति आयोग के अधिकारियों ने सराहा, और इसे नीति निर्माण में शामिल करने की संभावना जताई।
‘विकसित भारत रणनीति कक्ष’ नीति आयोग का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है, जो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को समर्पित है। इस कक्ष में डेटा-आधारित विश्लेषण और क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुभवों का समन्वय कर नीतियों को अधिक समावेशी बनाया जाता है। डीएम मित्तल ने कहा, “यह मंच न केवल नीतियों को दिशा देता है, बल्कि हमें अपने क्षेत्रों में बेहतर परिणाम लाने के लिए प्रेरित करता है।”
देवरिया के लिए यह गर्व का क्षण है कि उनकी डीएम नीति आयोग जैसे राष्ट्रीय मंच पर जिले का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। यह अनुभव निश्चित रूप से देवरिया में प्रशासनिक नवाचार और सुशासन को नई गति देगा, जिससे आमजन को योजनाओं का लाभ और प्रभावी ढंग से मिलेगा।















