फाइलेरिया दवा से 30 गांवों के 917 परिवारों का इनकार, प्रशासन सख्त
पौली और बेलहर ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग की टीमें असफल, बीडीओ-एडीओ को जिम्मेदारी
ग्राम पंचायत कर्मचारी और जनप्रतिनिधि खुली बैठकों में दवा खाकर करेंगे प्रेरित
लापरवाही पर होगी शासकीय कार्रवाई, दवा न खाने वाले होंगे जिम्मेदार
संतकबीरनगर। जिले के पौली और बेलहर कला ब्लॉक के 30 गांवों के 917 परिवारों ने फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम में दवा खाने से इनकार कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन परिवारों को समझाने में विफल रही हैं। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) जयकेश त्रिपाठी ने इस स्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) और सहायक विकास अधिकारी (एडीओ) पंचायत को निर्देश दिए हैं कि ग्राम पंचायत स्तरीय कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को लगाकर खुली बैठकों में फाइलेरिया दवा (डीईसी और एल्बेंडाजोल) का सेवन कर ग्रामीणों को प्रेरित किया जाए।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी:
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रामानुज कन्नौजिया ने कहा, “फाइलेरिया से बचाव के लिए साल में एक बार दवा की खुराक लेना अनिवार्य है। यह दवा पैरों में सूजन (पील पांव) जैसी गंभीर स्थिति को रोकती है। ग्रामीणों को चाहिए कि वे स्वयं आगे आएं और अभियान को सफल बनाएं।” सीडीओ ने स्पष्ट किया कि दवा न खाने वाले परिवार बीमारी फैलने की स्थिति में स्वयं जिम्मेदार होंगे, और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ शासकीय कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
प्रभावित गांव और परिवार:
विकास खंड पौली के बरगदवा, मटिहना, नरायनपुर, छांछापार, छपरा मगर्वी, बगही, मांझा चहोड़ा, मड़पौना, दुल्हापार कला, अजांव, कल्याणपट्टी, पचरा, पौली, रामपुर, गौरापार उर्फ गौसेसिंहपुर, निहैला, पूरे सुखलाल, और खैरा गांव के 589 परिवारों ने दवा खाने से मना किया है। वहीं, बेलहर कला ब्लॉक के देवलसा, डुहवा, कुसुरू खुर्द, मुंडेरी, गलौजी, दुधारा, मिश्रौलिया पराग, लोहरौली ठकुराई, खटियावां, बरडांड़, परासी गनवरिया, और पिपरा गांव के 328 परिवारों ने भी इनकार किया है।
प्रशासन की रणनीति:
स्वास्थ्य विभाग ने आशा, एएनएम, और रैपिड रिस्पॉन्स टीम के डॉक्टरों को लगाया है, लेकिन ग्रामीणों का रवैया नकारात्मक रहा। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के जिला सलाहकार प्रदीप त्रिपाठी के अनुसार, अब ग्राम प्रधान, सचिव, लेखपाल, बीडीसी सदस्य, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, कोटेदार, रोजगार सेवक, पंचायत सहायक, और सफाई कर्मचारी गांवों में खुली बैठकों में स्वयं दवा खाकर ग्रामीणों को प्रेरित करेंगे। यह अभियान 10 अगस्त से चल रहा है, और प्रशासन इसे पूरी तरह सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है















