रंग कबीर के रंग में रंगेगा यूपी, सितंबर से कबीर की वाणी को पेंटिंग्स में पिरोने की शुरुआत
मेरठ से होगी रंग कबीर की शुरुआत
हिंदी दिवस पर खुलेगी कबीर अकादमी की लाइब्रेरी
शोध और सांस्कृतिक गतिविधियों का बनेगा केंद्र
संतकबीरनगर। कबीर की शिक्षाओं और उनके सामाजिक-आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मगहर की कबीर अकादमी सितंबर 2025 से ‘रंग कबीर’ अभियान शुरू करने जा रही है। इस पहल का मकसद कबीर की वाणी, जीवन और दर्शन को पेंटिंग, नाटक, नृत्य और संगोष्ठियों के जरिए दूर-दूर तक फैलाना है। अभियान की शुरुआत मेरठ से होगी, जहां 10 चुनिंदा कलाकार तीन दिन तक कबीर के विचारों को कैनवास पर उतारेंगे।
28 जून 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मगहर में 50 करोड़ की परियोजनाओं की आधारशिला रखी थी, जिसमें 31.49 करोड़ की लागत से कबीर अकादमी व शोध संस्थान शामिल था। 10 जून 2022 को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसका लोकार्पण किया। मार्च 2024 में अतुल द्विवेदी के निदेशक बनने के बाद अकादमी ने गतिविधियों को गति दी। अप्रैल 2024 में वेबसाइट लॉन्च हुई और कार्य समिति व सांस्कृतिक परिषद की बैठकों में कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई।
निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया, “रंग कबीर के जरिए कबीर के विचारों को शिक्षा, समाज, धर्म और आध्यात्म से जोड़ा जाएगा। 13 सितंबर को मेरठ के विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के साथ मिलकर पांच प्रस्तुतियां होंगी, जिसमें कबीर पर आधारित दो नाटक, नौटंकी, ट्रांसजेंडर पर कत्थक नृत्य-नाटिका और संगोष्ठी शामिल हैं।”
हिंदी दिवस (14 सितंबर) पर अकादमी में लाइब्रेरी शुरू होगी, जिसमें कबीर पर केंद्रित पुस्तकें, डिजिटल और हार्डकॉपी संसाधन, चार प्रमुख अखबार और मैगजीन उपलब्ध होंगे। प्रतियोगी छात्रों के लिए वाचनालय की सुविधा भी होगी। अकादमी में 20 कमरों का छात्रावास और 300 लोगों की क्षमता वाला वातानुकूलित प्रेक्षागृह है, जो सांस्कृतिक आयोजनों के लिए 10 हजार रुपये और अतिरिक्त खर्चों पर बुक किया जा सकता है।
कबीर पर शोध के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्राओं ने कबीर पर कत्थक प्रस्तुति दी है, और बिरहा व किस्सागोई के जरिए भी कबीर को जनता तक पहुंचाया जा रहा है। यह पहल संतकबीरनगर को सांस्कृतिक और शैक्षिक केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।















