राष्ट्रपति ने एम्स के पहले दीक्षांत समारोह में नवाचार और सेवा पर जोर दिया
गोरखपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार, को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के पहले दीक्षांत समारोह में शिरकत की। उन्होंने चिकित्सा को सेवा का माध्यम बताते हुए डॉक्टरों के व्यवहार और समर्पण को मरीजों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण माना। राष्ट्रपति ने एम्स को भारत की चिकित्सा क्षमता और नवाचार का प्रतीक करार दिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि डॉक्टर का व्यवहार मरीज की मानसिक और शारीरिक स्थिति को प्रभावित करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से संवेदनशीलता और सहानुभूतिपूर्ण देखभाल पर जोर दिया, जो मरीज के तेजी से ठीक होने में सहायक है। एम्स के नवाचार, जैसे रोबोट असिस्टेड सर्जरी और एआई आधारित कैंसर डिटेक्शन, को कार्यशैली का हिस्सा बनाते हुए इसे शिक्षा, अनुसंधान, और सस्ती स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बताया। उन्होंने टेलीमेडिसिन और रोबोटिक सर्जरी जैसे तकनीकी विकास पर भी चर्चा की, लेकिन नैतिकता और मानवीय स्पर्श बनाए रखने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एम्स को पूर्वी यूपी, पश्चिमी बिहार, और नेपाल के 5-7 करोड़ लोगों के लिए चिकित्सा का केंद्र बताया। उन्होंने इंसेफेलाइटिस पर केस स्टडी का आह्वान किया और रिसर्च व विकास पर जोर दिया। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने डॉक्टरों से किसानों और गरीबों की सेवा का आह्वान किया, जबकि केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एम्स की स्थापना से पूर्वांचल को मिली राहत और मोदी सरकार के 7 से 23 एम्स तक विस्तार को सराहा।
समारोह में विद्यार्थियों को उपाधि और मेडल दिए गए। मौजूद रहे राज्यपाल, सीएम, अनुप्रिया पटेल, सांसद रवि किशन, और एम्स अध्यक्ष देशदीपक वर्मा। यह आयोजन एम्स की प्रगति और चिकित्सा सेवा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बना।















