बिजली कर्मचारियों का आक्रोश: पावर कॉरपोरेशन के तानाशाही आदेश की प्रतियां जली, चेयरमैन की बर्खास्तगी की मांग।
गोरखपुर,
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन के तानाशाही और असंवैधानिक आदेश के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया। गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी, आगरा, झांसी, प्रयागराज, कानपुर सहित सभी जनपदों और परियोजनाओं में कर्मचारियों ने कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश की प्रतियां जलाईं। समिति ने चेयरमैन पर औद्योगिक अशांति पैदा कर हड़ताल थोपने और निजीकरण के लिए अनुचित दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की।
संघर्ष समिति ने कॉरपोरेशन के निदेशक (वित्त) निधि नारंग के कार्यकाल को दूसरी बार तीन माह बढ़ाने को निजीकरण के घोटाले से जोड़ा। समिति ने दावा किया कि नारंग ने ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्नटन को क्लीन चिट दी, जिसकी नियुक्ति अवैध और विवादास्पद रही। समिति ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण को रोकने और कॉरपोरेशन के आंकड़ों की सीबीआई जांच की मांग की।
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने बताया कि चेयरमैन के इशारे पर महाप्रबंधक (आईआर) प्रदीप कुमार और महाप्रबंधक (एचआर) ए.के. सेठ पदाधिकारियों को धमकी दे रहे हैं, जिससे भय का माहौल बन रहा है। इं. पुष्पेंद्र सिंह, इं. अखिलेश यादव, इं. भानुप्रताप सिंह, शिवम चौधरी, अमित यादव सहित कई पदाधिकारियों ने इन धमकियों की निष्पक्ष जांच और दोषियों को दंडित करने की मांग की।
कर्मचारियों ने संविधान के अनुच्छेद 311(2) के उल्लंघन और उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय के फैसं के अपमान का आरोप लगाया। फिर भी, उन्होंने उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करते हुए शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखा। दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ, नोएडा, अयोध्या, ओबरा, पनकी सहित विभिन्न स्थानों पर विरोध सभाएं हुईं। समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर चेयरमैन की गतिविधियों पर रोक लगाने और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।















