गोरखपुर। वारदात को अंजाम देने के बाद दारोगा तीन दिन से बेनीगंज पुलिस चौकी में ही रुपये रखकर उसे खपाने की योजना बना रहा था। इस बीच व्यापारी जब भी रुपये वापस करने की अर्जी लेकर आया जेल भेजने की धमकी देकर लौटा देता। डर की वजह से तीन दिन तक पीड़ित व्यापारी चुप रहा। भेद खुलने पर उसी कोतवाली थाने से जेल भेजा गया जहां वह जनसुनवाई करता था।
सोमवार को घटना की जानकारी होने पर एसपी सिटी पुलिस चौकी पर पहुंचे। घटना के संबंध में पूछताछ करने पर आलोक सिंह ने इन्कार कर दिया। व्यापारी नवीन श्रीवास्तव पर साजिश रचने का आरोप लगाते हुए बताया कि जालसाजी के एक मुकदमे में वह पैरवी कर रहे थे।
बात न मानने पर झूठा आरोप लगाकर बदनाम कर रहे हैं, लेकिन सिपाहियों से बात की गई तो उन्होंने भेद खुल गया। उन्होंने चेकिंग में रुपये पकड़े जाने की पुष्टि कर दी। इसके बाद दारोगा को हिरासत में लेकर एसपी सिटी ने सख्ती दिखाई तो अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।
एसएसपी के निर्देश पर कोतवाली थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर निलंबित किए गए पूर्व चौकी प्रभारी आलोक सिंह व उसके सहयोगी प्रिंस श्रीवास्तव को गिरफ्तार कर लिया।















