गीडा में प्रदूषण पर सख्ती, औद्योगिक इकाइयों के नालों से लिए जाएंगे पानी के नमूने
सीईओ विशाल कुमार ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच के निर्देश, मानकों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर होगी कार्रवाई
गोरखपुर। गीडा क्षेत्र में संचालित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषित पानी की अब जांच कराई जाएगी। प्रदूषण की आशंका वाली इकाइयों के आसपास की नालियों के साथ मुख्य नाले में गिरने वाले पानी के नमूने लेकर उनकी जांच होगी। मानकों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रभावी नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मंगलवार दोपहर को गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल कुमार ने क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण और उसके नियंत्रण के उपायों की समीक्षा की गई।
सीईओ ने क्षेत्रीय अधिकारी को प्रदूषण की आशंका वाली इकाइयों के पास की नालियों से पानी के नमूने लेने के निर्देश दिए। इसके साथ ही औद्योगिक इकाइयों से मुख्य नाले में छोड़े जाने वाले पानी की भी सैंपलिंग कर जांच कराने को कहा। जांच में प्रदूषण मानकों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
एनएमसीजी में लंबित है सीईटीपी की डीपीआर
बैठक में गीडा की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले उत्प्रवाह के शोधन के लिए प्रस्तावित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की प्रगति की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने बताया कि सीईटीपी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) शासन से अनुमोदन के बाद स्वीकृति के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) को भेजी गई है। इसकी स्वीकृति फिलहाल एनएमसीजी स्तर पर लंबित है।
सीईओ ने अधिकारियों को एनएमसीजी से समन्वय कर डीपीआर की स्वीकृति के लिए प्रभावी पैरवी करने के निर्देश दिए, ताकि स्वीकृति मिलने के बाद सीईटीपी की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
बैठक में एसीईओ राम प्रकाश समेत गीडा और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।















