तलाक की दहलीज से लौटे पति-पत्नी, फिर थामा एक-दूसरे का हाथ
राष्ट्रीय लोक अदालत में काउंसलिंग के बाद गिले-शिकवे भूले, टूटते रिश्ते को एक और मौका देने का लिया फैसला
रायबरेली। राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को एक ऐसा भावुक मामला सामने आया, जिसने रिश्तों की अहमियत और सुलह की ताकत का एहसास करा दिया। आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दाखिल कर चुके पति-पत्नी ने न्यायालय की संवेदनशील पहल और काउंसलिंग के बाद अपने पुराने गिले-शिकवे भुला दिए। दोनों ने तलाक का रास्ता छोड़कर फिर से साथ रहने और अपना दांपत्य जीवन नए सिरे से शुरू करने का फैसला किया।
मामला प्रवीन कुमार बनाम श्रीमती शान्ती गुप्ता उर्फ पूर्णिमा गुप्ता, वाद संख्या 1588/2025, धारा 13-बी हिंदू विवाह अधिनियम से संबंधित था। दोनों का विवाह 16 दिसंबर 2023 को हुआ था। विवाह के बाद उनके बच्चे की गंभीर बीमारी के चलते असामयिक मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना ने दोनों को भीतर तक झकझोर दिया। मानसिक तनाव और परिस्थितियों के बीच दंपती के रिश्ते में मतभेद बढ़ते गए और आखिरकार दोनों अलग रहने लगे।
परिवार और समाज की ओर से सुलह के कई प्रयास किए गए, लेकिन बात नहीं बन सकी। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से विवाह विच्छेद के लिए न्यायालय में वाद दाखिल कर दिया। रिश्ता खत्म करने की प्रक्रिया अदालत तक पहुंच चुकी थी।
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, रायबरेली के समक्ष मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों की गहन काउंसलिंग कराई गई। न्यायालय ने उन्हें अपने रिश्ते, साथ बिताए समय और जीवन में आई परिस्थितियों पर दोबारा विचार करने के लिए प्रेरित किया। बातचीत के दौरान दोनों ने एक-दूसरे के प्रति अपनी भावनाओं और मन की पीड़ा साझा की।
काउंसलिंग का असर हुआ और तलाक की ओर बढ़ चुके दोनों कदम ठिठक गए। दंपती ने पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़ते हुए अदालत के समक्ष सुलहनामा प्रस्तुत किया। दोनों ने स्पष्ट किया कि वे अब फिर से साथ रहेंगे और अपने दांपत्य जीवन को एक और अवसर देंगे।
इस तरह राष्ट्रीय लोक अदालत में केवल एक मुकदमे का निस्तारण नहीं हुआ, बल्कि एक टूटता हुआ परिवार भी बिखरने से बच गया। जिस रिश्ते का अंत तलाक के कागजों में लिखा जाने वाला था, उसे सुलह और समझदारी ने फिर से नई शुरुआत दे दी।
अदालत की पहल ने बचाया आशियाना, रिश्तों को मिला एक और मौका।















