राष्ट्रीय लोक अदालत में 65,724 वादों का निस्तारण, 14 दंपतियों के रिश्तों में फिर लौटी मिठास
सुलह-समझौते से साथ रहने को राजी हुए पति-पत्नी, मोटर दुर्घटना के 111 मामलों में 41.11 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति
बस्ती। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बस्ती की ओर से शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जनपद न्यायालय परिसर सहित ग्राम न्यायालयों, तहसीलों, राजस्व न्यायालयों और कलेक्ट्रेट में लगी विभिन्न पीठों के समक्ष बड़ी संख्या में वादों की सुनवाई हुई। सुलह-समझौते के आधार पर कुल 65,724 वादों का निस्तारण किया गया। इस दौरान 5,92,39,413 रुपये की धनराशि वसूल की गई।
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ बस्ती मंडल के प्रशासनिक न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। एक दिवसीय दौरे पर जिला एवं सत्र न्यायालय पहुंचे प्रशासनिक न्यायमूर्ति का जनपद न्यायाधीश शमसुल हक ने लाइव प्लांट और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव देवेंद्र कुमार-प्रथम ने बुके देकर स्वागत किया।
इसके बाद प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने जिला कारागार बस्ती की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी का फीता काटकर उद्घाटन किया। न्यायालय परिसर में न्यायिक अधिकारियों के साथ पौधरोपण किया और बैंकों की ओर से लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (ईसी एक्ट) के निरीक्षण के दौरान लोक अदालत में नियत वादों के संबंध में जानकारी ली।
14 परिवारों में फिर जगी साथ रहने की उम्मीद
लोक अदालत के दौरान परिवार न्यायालय में भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। सुलह-समझौते के बाद साथ रहने को तैयार दंपतियों ने एक-दूसरे को माला पहनाई। प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने दंपतियों को बधाई देते हुए उनके सुखमय वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। परिवार न्यायालय में कुल 51 वादों का निस्तारण हुआ, जिनमें 14 दंपतियों ने आपसी सुलह के बाद फिर साथ रहने का निर्णय लिया।
न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक में दिए निर्देश
प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने बार के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक में न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता, समय से न्यायालय पहुंचने और उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रारूप के अनुरूप निर्णय पारित करने पर जोर दिया। उन्होंने साक्ष्यों के समुचित मूल्यांकन के साथ निर्णय लेखन में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। जनपद न्यायालय की इन्फ्रास्ट्रक्चर कमेटी के साथ भी बैठक कर आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा की।
मोटर दुर्घटना के 111 मामलों में 41.11 करोड़ की क्षतिपूर्ति
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवेंद्र कुमार-प्रथम के अनुसार मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 111 मामलों का निस्तारण करते हुए पीड़ितों को 41,11,70,000 रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाई गई। भूमि अर्जन प्राधिकरण का एक मामला तथा उपभोक्ता फोरम के 67 मामलों का भी निस्तारण हुआ। विभिन्न न्यायालयों से कुल 3,186 मामलों का निस्तारण किया गया।
वहीं, प्री-लिटिगेशन स्तर पर 62,538 मामलों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया। इस तरह राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 65,724 वाद निस्तारित हुए और 5,92,39,413 रुपये की धनराशि वसूल की गई।
इस अवसर पर पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण मो. रिजवानुल हक, भूमि अर्जन प्राधिकरण के पीठासीन अधिकारी बाबू राम, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय कुं. आराधना रानी, उपभोक्ता फोरम के अमरजीत वर्मा, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष राकेश कुमार शुक्ला, अपर जिला जज प्रथम कमलेश कुमार, अपर जिला जज एससी/एसटी एक्ट रामकरन यादव, नोडल अधिकारी प्रमोद कुमार गिरि, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप, सिविल जज सीडी साबिहा खातून, एसीजेएम प्रथम राज बाबू, एसीजेएम द्वितीय आरिफ अहमद अंसारी सहित समस्त न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों द्वारा तैयार हस्तशिल्प उत्पादों तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से ‘एक जिला, एक उत्पाद’ के तहत तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और आमजन ने प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ उत्पादों की खरीदारी भी की।
लोक अदालत के सफल आयोजन में जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष शमसुल हक के मार्गदर्शन में नोडल अधिकारी/अपर जिला जज प्रमोद कुमार गिरि, सचिव देवेंद्र कुमार-प्रथम, जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना, पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।















